✤ Political Science✤
✢ राजनीतिक विज्ञान ✢
❈ संविधान सभा का विकास ❈
महत्वपूर्ण जानकारी ➤
- संविधान के ऐतिहासिक विकास की शुरुआत = 1600ई.
- इसी वर्ष इंग्लैंड में (31 December 1600 ) ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई थी और महारानी एलिजाबेथ द्वारा भारत व्यापार अनुमति दी गई।
- कंपनी के प्रबंधन की समस्त शक्ति गवर्नर तथा 24 सदस्यीय परिषद में थी।
- 1757 ई. की प्लासी की लड़ाई और 1764 ई. के बक्सर के युद्ध को अंग्रेजो द्वारा जीत लिए जाने के बाद बंगाल पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने शासन का शिकंजा कसा और उस शासन को बनाए रखने के लिए अंग्रेजों ने समय-समय पर कई एक्ट पारित किये जो भारतीय संविधान के विकास की सीढ़ियां बनी
❈ ब्रिटिश सरकार द्वारा पारित एक्ट ❈
❈ 1726 का चार्टर एक्ट ❈
प्रावधान और विशेषताएं ➺
- कोलकाता, मुंबई, मद्रास प्रेसिडेंसीयो के राज्यपाल एवं उनकी परिषद को विधायी अधिकार दिए।
- शक्ति निहित = कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स।
❈ 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट ❈
महत्वपूर्ण जानकारी ➤
- प्रवर्तक = तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री - लॉर्ड नार्थ
- लागू हुआ = 1 जनवरी 1774ई.
प्रावधान और उद्देश्य ➺
- कंपनी के व्याप्त भ्रष्टाचार और कुप्रशासन को दूर करना ।
- कंपनी के कार्यों को नियमित नियंत्रित करना।
- बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर जनरल बना लिया।
नोट ➺ प्रथम गवर्नर जनरल - वारेन हेस्टिंग
- प्रथम बार कंपनी के प्रशासनिक और राजनीतिक कार्यों को मान्यता मिली।
- 1774 ई. में कोलकाता ( फोर्ट विलियम ) में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना अफेक्स न्यायलय के रूप में हुई ।
- कंपनी के कर्मचारीयो का निजी व्यापार पर तथा भारतीयों से रिश्वत व उपहार लेने पर रोक।
- कंपनी की देखरेख के लिए कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की स्थापना। ( सदस्य 24 )
- इस एक्ट द्वारा कोलकाता में एक सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गई इस कोर्ट को दीवानी, फौजदारी, नौसेना तथा धार्मिक मामलों की सुनवाई का अधिकार दिया गया।
नोट ➺ इस कोर्ट में एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अपर न्यायाधीश थे
- प्रथम मुख्य न्यायाधीश - सर अलीजाह ईम्पे
अन्य 3 न्यायाधीश
- चैम्बरस
- लिमेंस्टर
- हाइड
- राजस्व, नागरिक और सैन्य मामलों की जानकारी बि ब्रिटिश सरकार को देना आवश्यक कर दिया ।
❈ एक्ट ऑफ सेटलमेंट ❈
- सन 1781 में ब्रिटिश संसद में रेगुलेटिंग एक्ट की कमियों को दूर करने के लिए इस एक्ट का प्रावधान किया गया इस एक्ट के अनुसार कलकता की सरकार को बंगाल, बिहार और उड़ीसा के लिए विधि बनाने का प्राधिकार दिया।
❈ 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट ❈
महत्वपूर्ण जानकारी ➤
- एक्ट पारित - 1784 ई.
- प्रस्तुत किया - विलियम पीठ
- इस अधिनियम द्वारा पहली बार भारत में कंपनी के अधीन क्षेत्र को ब्रिटिश आधिपत्य क्षेत्र कहा गया
- इस एक्ट को एक्ट ऑफ सेटलमेंट भी कहा जाता है।
प्रावधान ➺
- द्वैध शासन व्यवस्था का प्रारंभ।
- कंपनी के राजनीतिक व वाणिज्य कार्यों को अलग कर दिया।
- कंपनी के राजनीतिक मामलों के लिए बोर्ड ऑफ कंट्रोल की व्यवस्था की जिसमें 6 सदस्यों का प्रावधान है ।
- कंपनी के व्यापारिक कार्यों के लिए कोर्ट ऑफ डायरेक्टस का प्रावधान।
- भारतीय विषयों को प्रत्यक्ष रूप से ब्रिटिश सरकार के सामने रखा।
नोट ➺ प्रथम बार भारतीय मामले में ब्रिटिश सरकार गिरी।
❈ 1793 का चार्टर एक्ट ❈
प्रावधान और विशेषताएं ➺
- स्थाई बंदोबस्त प्रणाली को मान्यता।
- कंपनी के सदस्यों का वेतन भारतीय कोष देना।
- गवर्नर जनरल की योग्यता निर्धारित, शक्तियों में भर्ती
- बंगाल के गवर्नर जनरल का मुंबई मद्रास प्रेसीडेंसीयो पर अधिकार स्पष्ट कर दीय।
- राजस्व बोर्ड व राजस्व पुलिस की स्थापना।
❈ 1813 का चार्टर एक्ट ❈
प्रावधान और विशेषताएं ➺
- कंपनी के विशेषाधिकारो की अवधि 20 वर्ष के लिए बढ़ा दी गई
- भारत की शिक्षा का एक लाख वार्षिक खर्च करने का प्रावधान ।
- एक्ट के तहत नव सृजित सर्वोच्च पद गवर्नर जनरल था ।
- ईसाई धर्म प्रचार को भारत में स्वतंत्रता।
- ईसाई पादरियों को आज्ञा प्राप्त करके भारत आने की सुविधा मिली।
- भारत में व्यापारी वर्ग का जन्म। भारत में व्यापार समस्त ब्रिटिश व्यापारियों के लिए खोला।
- भारत में कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिया। केवल 2 व्यापारिक अधिकार रहें। 1. चाय का व्यापार 2. चीन के साथ व्यापार ( 20 वर्ष वर्षों तक अधिकार रहा )
❈ 1833 का चार्टर एक्ट ❈
प्रावधान और विशेषताएं ➺
- कंपनी के व्यापारिक अधिकारों को पूर्णत समाप्ति
- देश में एक केंद्रीय शासन प्रणाली की शुरुआत
- बंगाल के गवर्नर जनरल को संपूर्ण भारत का गवर्नर जनरल बना दिया
- गवर्नर जनरल की परिषद में चौथे सदस्य को कानून विशेषज्ञ के रूप में बढ़ाया गया
- कम्पनी के पद के लिए धर्म, वंश, रंग या जन्म स्थान आदि के आधार पर किसी भारतीय को कंपनी के किसी पद से जिसके वो योग्य है वंचित नहीं रखा जायेगा।
- मद्रास और बम्बई प्रेसीडेंसी के गवर्नरों की विधायी शक्तियों को समाप्त कर दिया गया।
- कंपनी के चीन से व्यापार तथा चाय व्यापार का एकाधिकार को समाप्त कर दिया
- दास प्रथा की समाप्ति ( 1843 )
- कंपनी को विशुद्ध प्रशासनिक संस्था दिया गया
- भारतीय कानूनों का वर्गीकरण किया और प्रथम विधि आयोग की शुरुआत की
❈ 1853 का चार्टर एक्ट ❈
प्रावधान और विशेषताएं ➺
- संपूर्ण भारत के लिए विधानमंडल का प्रावधान।
- भारतीय केंद्रीय विधान परिषद स्थानीय प्रतिनिधित्व का समावेश किया।
- बंगाल के लिए लेफ्टिनेंट गवर्नर जनरल का पद बनाया।
- गवर्नर जनरल के विधायी प्रशासनिक कार्यों का विभाजन सर्वप्रथम किया।
- ईस्ट इंडिया कंपनी केवल प्रशासनिक वजूद ही रह गई इसके बोर्ड ऑफ डायरेक्ट के छह सदस्य हटाएं।
- केंद्र विधान परिषद में 6 सदस्य कर दीय इन 6 सदस्यों में से चार को मुंबई, मद्रास, बंगाल एवं आगरा की प्रांतीय सरकारों को नियुक्त कर दिया।
- गवर्नर जनरल परिषद के स्थाई एवं कार्यपालिका कार्यों को अलग अलग कर दिए।
- सिविल सेवकों की भर्ती के लिए प्रतियोगिता प्रणाली की शुरुआत की गई। 1853 में पहली बार ( आई सी एस ) के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की गई।
- 1854 में भारतीय सिविल सेवा के संबंध में मैकाले समिति की नियुक्ति की।
❈ 1858 का भारत शासन अधिनियम ❈
महत्वपूर्ण जानकारी ➤
- प्रस्तुत किया - लार्ड पामस्टर्न
- पारित किया - ब्रिटिश संसद द्वारा।
प्रावधान और विशेषताएं ➺
- भारतीय प्रशासन के लिए नए पद भारत सचिव का सर्जन किया जो ब्रिटिश कैबिनेट का सदस्य होगा।
- भारत के शासन को कंपनी के हाथों से सम्राट को दे दिया तथा भारत का शासन इंग्लैंड के सम्राट के नाम से किया जाने लगा।
- ब्रिटिश संसद में भारत मंत्री का पद एवं बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स एवं बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल को ख़त्म करके 15 सदस्यीय भारतीय परिषद का गठन किया गया। ( 8 सदस्य ब्रिटिश सरकार द्वारा तथा 7 सदस्य कंपनी के निदेशक मंडल द्वारा )
- भारत के शासन पर इंग्लैंड की संसद का सीधा व प्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित किया गया।
- गवर्नर जनरल का नाम बदलकर भारत का वायसराय कर दिया गया।
- इस एक्ट द्वारा महारानी विक्टोरिया को भारत की साम्राज्ञी नियुक्त की गई ।
- इस एक्ट को फाँर दी बेटर गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की संज्ञा दी ।
- कुछ जातियों को लड़ाकू व हराकू घोषित किया गया ।
- भारतीय सेना में यूरोपीय अनुपात को बढाया गया । ( बंगाल में 2:5 अवध में 1:2 करने की बात की )
- देसी रजवाड़ों की यथास्थिति बनाई गई ।
- ईस्ट इंडिया कंपनी का अंत।
नोट ➺ इस अधिनियम को इलाहाबाद घोषणा पत्र, विक्टोरिया घोषणा पत्र ,अधिकारों का मैग्नाकार्टा , भारत के शासन को अच्छा बनाने वाला एक्ट के नाम से भी जाना जाता है।
❈ 1861 का भारतीय परिषद अधिनियम ❈
प्रावधान और विशेषताएं ➺
- गवर्नर जनरल को अध्यादेश ( अवधि - 6 महीने ) जारी करने व वीटो की शक्ति प्रदान की ।
- इसके द्वारा कानून बनाने की प्रक्रिया में भारतीय प्रतिनिधियों को शामिल करने की शुरुआत हुई। गवर्नर जनरल के कार्यकारी व विधान परिषद जैसी संस्थाओं में भारतीयों को लिया।
- विभागीय प्रणाली का प्रारंभ हुआ ( लॉर्ड कैनिंग द्वारा )
- कोलकाता मुंबई , मद्रास हाई कोर्ट की स्थापना की और व्यवस्थापिका संबंधी अधिकार दिए ।
- विभागीय प्रणाली / मंत्रि मंडलीय प्रणाली की शुरुआत ( पोर्टफोलियो प्रणाली द्वारा लॉर्ड कैनिंग ने ) की गई।
नोट ➺ लॉर्ड कैनिंग ने तीन भारतीयों - " बनारस के राजा" “ पटियाला के महाराजा" “सर दिनकर राव” को विधान परिषद में मनोनीत किया।
❈ 1873 का अधिनियम ❈
प्रावधान और विशेषताएं ➺
- इस अधिनियम द्वारा यह उपबंध किया गया की ईस्ट इंडिया कंपनी को कभी भी भंग किया जा सकता है।
- 1 जनवरी 1884 ई. को ईस्ट इंडिया कंपनी को औपचारिक रूप से भंग कर दिया।
❈ 1876 का शाही उपाधि अधिनियम ❈
प्रावधान और विशेषताएं ➺
- औपचारिक रूप से भारत सरकार का ब्रिटिश सरकार को अन्तरण मान्य किया गया ।
- 28 अप्रैल 1876 को एक घोषणा द्वारा महारानी विक्टोरिया को भारत की साम्राज्ञी घोषित की।
❈ 1892 का भारत परिषद अधिनियम ❈
प्रावधान और विशेषताएं ➺
- केंद्रीय विधान मंडल में गैर सरकारी सदस्यों की न्यूनतम संख्या 10 व अधिकतम 16 की गई।
- विधान परिषद का आकार बढ़ा दिया गया ।
- कार्यपालिका व बजट पर बहस या प्रश्न पूछने का अधिकार ।
- प्रथम बार अप्रत्यक्ष रूप से केंद्रीय तथा प्रांतीय विधान परिषदो में निर्वाचन की व्यवस्था की।
❈ 1909 का मार्ले मिंटो सुधार अधिनियम / भारत परिषद अधिनियम ❈
प्रावधान और विशेषताएं ➺
- मुसलमानों के लिए अतिरिक्त निर्वाचन मंडल की शुरुआत तथा अलग प्रतिनिधित्व की व्यवस्था।
- सांप्रदायिक निर्वाचन प्रणाली की शुरुआत । ( जनक - लॉर्ड मिंटो )
- लॉर्ड मार्ले इंग्लैंड में भारत सचिव, भारत के वायसराय , राज्य सचिव , लॉर्ड मिंटो के तत्कालीन वायसराय थे।
- पहली बार किसी भारतीय को वायसराय और गवर्नर की कार्यपरिषद के साथ एसोसिएशन बनाने का प्रावधान ।
- सत्येंद्र प्रसाद सिंहा को कानून सदस्य नियुक्त किया गया। ( पहले भारतीय सदस्य )
- जाति , वर्ग , धर्म आदी के आधार पर अलग निर्वाचन क्षेत्र बनाने का प्रावधान ।
- केन्द्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों के आकार में काफी वृद्धि की गयी। केन्द्रीय परिषद की संख्या को 16 से बढ़ाकर 60 कर दिया गया। इसमें 32 गैर सरकारी सदस्यों में से 27 सदस्य निर्वाचित होते थे जिसमें 15 सदस्य मनोनीत होते थे।
- इसमें प्रेसीडेंसी कार्पोरेशन, चैंबर्स ऑफ कॉमर्स विश्वविद्यालयों और जमीदारों के लिए अलग प्रतिनिधित्व का प्रावधान भी किया गया।
अधिनियम के बारे में मत ➺
- लॉर्ड मिंटो ➜ हम नाग के दांत बोल रहे हैं इसका फल भीषण होगा।
- मुंशी ➜ इन्होंने उभरते प्रजातंत्र को मार डाला।
- मजूमदार ➜ 1909 के सुधार केवल चंद्रमा की चांदनी के समान है ।
- रैम्जे मैकडोनाल्ड ➜ यह सुधार प्रजातंत्रवाद और नौकरशाही के मध्य एक अधूरा और अल्पकालीन समझौता है।
❈ 1919 का भारत सरकार अधिनियम❈
महत्वपूर्ण जानकारी ➤
- तत्कालीन वायसराय = लॉर्ड चेम्सफोर्ड
- तात्कालिक भारत सचिव = I.S मांटेग्यू
- अधिनियम का तत्कालिक कारण = होमरूल आंदोलन मेसोपोटामिया कमीशन की रिपोर्ट
- मुख्य उद्देश्य = उत्तरदाई शासन की स्थापना
नोट ➺ मांटेग्यू चेम्सफोर्ड अधिनियम के नाम से भी जाना जाता है ।
प्रावधान और विशेषताएं ➺
- प्रांतों में द्वैध शासन की स्थापना ( जनक = लियोनस कार्टियस )
- बंगाल ( 239सदस्य )
- बिहार व उड़ीसा ( 103 सदस्य )
- आसाम ( 53 सदस्य )
- संयुक्त प्रांत ( 123 सदस्य )
- मध्य प्रांत एवं बरार ( 70 सदस्य )
- पंजाब ( 93 सदस्य )
- मुंबई ( 111 सदस्य )
- मद्रास ( 127सदस्य )
- केंद्र में द्विसदनात्मक विधायिका की व्यवस्था की।
- केंद्रीय विधान सभा सदस्य = 144
- राज्य परिषद सदस्य = 60
- राज्य परिषद में निर्वाचित सदस्य = 34
- राज्य परिषद में कार्यकाल = 5 साल
- केंद्रीय विधानसभा में 104 निर्वाचित तथा 40 मनोनीत थे।
- केंद्रीय विधानसभा में कार्यकाल = 3 साल
- द्वैध शासन के अनुसार प्रांतीय शासन के विषय को दो भागों में विभाजित -
- आरक्षित विषय ➜ वित्, भूमि कर, अकाल सहायता, न्याय, पुलिस, पेंसन, आपराधिक जातीया, छापाखाना,समाचार पत्र, सिंचाई, जल मार्ग, खान और बिजली, गैस, श्रमिक कल्याण, ओधोगिक विवाद,मोटर गाड़ियां, छोटे बंदरगाह और सार्वजनिक सेवाए आदि। ( प्रशासन गवर्नर और उसकी कार्यकारी परिषद द्वारा )
- हस्तांतरित विषय ➜ शिक्षा, पुस्तकालय, संग्रालय, स्थानीय स्वायत्त शासन, चिकित्सा सहायता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, आबकारी, उधोग, तोल तथा माप, सर्वजनिक मनोरंजन पर रनियंत्रण, धार्मिक तथा अग्र्हार दान आदि । ( प्रशासन गवर्नर द्वारा विधान परिषद के प्रति उत्तरदाई मंत्रियों की सहायता द्वारा )
- नरेश मंडल की स्थापना = 8 जनवरी 1921 { अध्यक्ष - गवर्नर जनरल (वायसराय ) (मुख्यालय - दिल्ली) ब्रिटेन के राजा - जॉर्ज पंचम थे }
- वायसराय की कार्यकारी परिषद में 6 सदस्यों में से commander-in-chief को छोड़कर 3 सदस्यों का भारतीय होना आवश्यक था।
- सांप्रदायिक प्रणाली को व्यापक बनाया जिसके द्वारा सिख, ईसाई यूरोपवासियों , आंगन भारतीयों को भी प्रथक निर्वाचन अधिकारी प्रदान किए गए।
- सामान्य बजट से रेलवे बजट को अलग करने का प्रावधान।
- उच्चायुक्त पद का सृजन।
- भारत में लोक सेवा आयोग के गठन का प्रावधान । ( ली कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर सन 1926 को गठन )
- भारत सचिव को भारत में महालेखा परीक्षक की नियुक्ति करने का अधिकार।
- सिविल सेवकों की भर्ती के लिए केंद्रीय लोक सेवा आयोग का गठन।
- प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली लागू ।
- व्यस्क मताधिकार को बढ़ावा ।
- प्रांतों में आंशिक उत्तरदाई शासन की स्थापना ।
- शक्तियों का विभाजन – केंद्रीय सुची व प्रांतीय सुची।
- इस अधिनियम के 10 वर्ष बाद वैज्ञानिक आयोग की स्थापना कर समीक्षा का प्रावधान।
- सिखों को वोट देने का अधिकार।
- प्रांतों में पहली बार उधार लेने और कर लगाने का अधिकार का प्रावधान ।
- केंद्रीय बजट और प्रान्तीय बजट अलग अलग पेश करने का प्रावधान।
- भारत में पहली बार महिलाओं को वोट देने का अधिकार
अधिनियम के बारे में मत ➺
- बाल गंगाधर तिलक ➜ बिना सूरज का सवेरा
- कांग्रेस पार्टी ➜ निराशाजनक व संतोष की संज्ञा
- सुभाष चंद्र बोस ➜ नौकरशाही पद्धति का उल्लंघन
- श्री निवास ➜ बेडियो का नया जाल
- मांटेग्यू ➜ ब्रिटिश संसद में भारत की जनता के मध्य सेतु के समान
नोट ➺ 1928 में साइमन कमीशन भारत आया । ( यह वैधानिक आयोग के रूप में भी जाना जाता है। )
❈ साइमन कमीशन ❈
✢ साइमन कमीशन का गठन ✢
महत्वपूर्ण जानकारी ➤
- तत्कालीन अध्यक्ष - वायसराय लार्ड इरविन
- भारत सचिव – ब्रिकिन हैड
- उदेश्य - 1919 के अधिनियम की समीक्षा करना।
- गठन - 8 नवंबर 1927
- भारत आया - 1928
- रिपोर्ट - 1930
- अध्यक्ष - सर जॉन साइमन ( कुल सदस्य 7 अध्यक्ष सहित )
- क्लीमेंट एटली
- हैरी लेवी लाँशन
- एडवर्ड कैडगाॅन
- वरनाॅन हार्टस्हाते
- फाॅक्स
- डोनाल्ड हवार्ड
- भारत में हर जगह विरोध का कारण - इसमें एक भी भारतीय नहीं था ।
- 30 अक्टूबर 1928 लाहौर में लाला लाजपत राय विरोध के फल स्वरुप सान्ड्रस की लाठियों से मृत्यु ।
- लाला लाजपत राय का प्रसिद्ध कथन ( मृत्यु के समय - मेरे शरीर पर लगी एक-एक लाठी अंग्रेजी ताबूत की कील साबित होगी।
- साइमन कमीशन का विरोध न करने वाला दल - जस्टिस पार्टी ।
❈ 1935 का भारत सरकार अधिनियम ❈
महत्वपूर्ण जानकारी ➤
- तत्कालीन वायसराय - लार्ड विलिंटन
- भारत सचिव - सैमुअल हाैर।
- भारत शासन अधिनियम 1935 में अनुच्छेद - 451 ( परिशिष्ट 15 )
- एक्ट प्रस्तुत करने की तिथि - 4 अगस्त 1935
- लागू - 1937
प्रावधान और विशेषताएं ➺
- इस एक्ट में 321 अनुच्छेद और 10 अनुसूचियां थी ।
- प्रांतीय स्वायत्तता -प्रांतों में द्वैध शासन व्यवस्था का अंत( 1अप्रैल 1937 से लागू )
- अखिल भारतीय संघ का प्रावधान । ( 11ब्रिटिश प्रांत, 6 चीफ कमिश्नर क्षेत्र व देशी रियाशत से बना )
- भारत में एक सघिंय न्यायलय की स्थापना ( दिल्ली में )
- ब्रिटिश संसद की सर्वोच्चता का प्रावधान ।
- भारत परिषद की समाप्ति ( 1858 एक्ट से )
- सांप्रदायिक निर्वाचन पद्धति का विस्तार ।
- वर्मा को भारत से करने का प्रावधान ( 1937 )
- सर्वोच्च न्यायालय व R.B.I स्थापना का प्रावधान ( 1 अप्रैल 1935 को )
- मताधिकार का विस्तार।
- सांप्रदायिक निर्वाचन पद्धति का विस्तार - मुसलमान, सिख, आंग्ल भारतीय, भारतीय ईसाई, यूरोपियन, हरिजन वर्ग, महिलाओं और मजदूर वर्ग के लिए अलग से निर्वाचन व्यवस्था की गई ।
- भारत में संघात्मक सरकार की स्थापना ।
- उड़ीसा व सिंध प्रांत का निर्माण प्रावधान ।
- संघिय रेलवे प्राधिकार की व्यवस्था का प्रावधान ।
- महादधिवक्ता कि नियुक्त का प्रावधान ।
- संघ लोक सेवा आयोग व प्रांतों के लिए लोक सेवा आयोग का प्रावधान
- विधान मंडलों का विस्तार विधानसभा :-
- केंद्र में द्वैध शासन प्रणाली की शुरुआत ।
नोट ➺ द्वैध शासन प्रणाली में शक्तियों का विभाजन और इन सूचियों का निर्माण :-
- संघ सूची ( 59 विषय ) = { परिसंघ विधान मंडल को विधान बनाने के अन्यन शक्ति थी इस सूची में विदेशी कार्य, करंसी मुद्रा, नौसेना, सेना, वायुसेना, जनगणना जैसे विषय थे }
- राज्य सूची / प्रांतीय सूची ( 54 विषय ) = { प्रान्तीय विधान मंडलों की अन्य अधिकारिता थी यानी इस सूची में वर्णित विषय पर प्रांतीय विधानमंडल को कानून बनाने का अधिकार था। प्रांतीय सूची के विषय - पुलिस, प्रांतीय लोक सेवा और शिक्षा }
- समवर्ती सूची ( 36 विषय ) = { समवर्ती सूची के विषय पर परिसंघ और प्रांतीय विधानमंडल दोनों कानून बनाने के लिए सक्षम थे। समवर्ती सूची के विषय - दंड विधि और प्रक्रिया, सिविल प्रक्रिया, विवाह एवं विवाह विच्छेद आदि। }
अधिनियम के बारे में मत ➺
- पंडित जवाहरलाल नेहरू ➜ दासता का घोषणा पत्र व अनेक ब्रेक वाला इंजन रहित गाड़ी
- प्रो0 कुपलैण्ड ➜ रचनात्मक राजनीतिक विचारों की एक महान सफलता
- लार्ड एटली ➜ अविश्वास का प्रतीक
- प्रो0 मोहम्मद अली जिन्ना ➜ पूर्णतया सड़ा हुआ , बुरा और बिल्कुल रद्दी की टोकरी में फेंकने लायक
- मदन मोहन मालवीय ➜ बाहर से लोकतांत्रिक व अंदर से खोखला
- राजगोपाल चारी ➜ नया द्वैध शासन पुराने द्वैध शासन से बुरा
❈ 1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ❈
महत्वपूर्ण जानकारी ➤
- प्रस्तुत = 4 जुलाई 1947
- पारित = 18 जुलाई 1947
- धाराए = 20
- 20 फरवरी 1947 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री कलीमेंट एटली ने घोषणा की 30 जून 1947 को ब्रिटिश शासन समाप्त।
- 1947 को सर्वप्रथम भारतीयों को सत्ता सौंपने की योजना - माउंटबेटन योजना ( 3 जून 1947 )
प्रावधान और विशेषताएं ➺
- भारत-पाक दो अधि राज्यों की स्थापना ( 15 अगस्त 1947 )। दोनों राज्यों के लिए अलग-अलग गवर्नर जनरल का प्रावधान ।
- 1935 के भारत शासन अधिनियम द्वारा शासन।
- भारत सचिव पद समाप्त।
- राष्ट्रमंडल की सदस्यता इच्छा अनुसार रखने अथवा छोड़ने का प्रावधान।
- भारत सम्राट शब्द समाप्त।
- देसी रियासतों को किसी भी अधिराज्य में शामिल होने की स्वतंत्रता ।
- संविधान सभा , विधान मंडल के रूप में कार्य करेगी।
- गवर्नर जनरल सवैधानिक प्रमुखों के रूप में कार्य करेगा।
- संविधान सभा को सत्ता सौंपने का प्रावधान।
- सीमा आयोग का गठन का प्रावधान।
- भारत डोमिनियन को सिंध , बलूचिस्तान , पश्चिमी पंजाब , पूर्वी बंगाल , पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत और असम के सिलहट जिले को छोड़कर भारत का शेष क्षेत्र मिल गया।
❈ भारतीय संविधान ❈
✢ भारतीय संविधान का निर्माण ✢
महत्वपूर्ण जानकारी ➤
- भारतीय संविधान के निर्माण करने वाली संविधान सभा का गठन - जुलाई 1946 ई.
- सर्वप्रथम संविधान सभा का विचार - स्वराज पार्टी 1924 ई.
- उत्त्पति - लैटिन सब्द कोंस्टीटूर ( Constiture )से। ( अर्थ - प्रबंध करना )
- परिभाषा - किसी राष्ट्र की लिखित या अलिखित सर्वोच्च विधि जिसके अनुसार शासन चलाया जाता है।
- उत्पत्ति का स्त्रोत – मेसो पोटामिया की सभ्यता (हब्बुराबी में 2100 ई0 पू0 )
- सर्वप्रथम संविधान शब्द का प्रयोग - हैनरी मैन ( ब्रिटेन )
- लागू किया - 26 जनवरी 1950
संविधान सभा के महत्वपूर्ण तथ्य ➺
- संविधान निर्माण की सर्वप्रथम मांग बाल गंगाधर तिलक द्वारा 1895 में "स्वराज विधेयक" द्वारा की गई।
- 1922 में गांधी जी ने कहा भारतीय संविधान का निर्माण -भारतीय लोगों की इच्छाओं के अनुसार किया जाएगा।
- 1924 में मोतीलाल नेहरू ने संविधान सभा के गठन की मांग की
- अगस्त 1928 में नेहरू रिपोर्ट बनाई गई। जिसकी अध्यक्षता पं. मोतीलाल नेहरू ने की। इसका निर्माण बम्बई में किया गया। इसके अन्तर्गत ब्रिटीश भारत का पहला लिखित संविधान बनाया गया। जिसमें मौलिक अधिकारों अल्पसंख्यकों के अधिकारों तथा अखिल भारतीय संघ एवम् डोमिनियम स्टेट के प्रावधान रखे गए।
- 1929 में जवाहर लाला नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस का लाहौर सम्मेलन हुआ। जिसमें पूर्ण स्वराज्य की मांग की गई।
- 1935 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा संविधान सभा की मांग की।
- 1936 में कांग्रेस का फैजलपुर सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें कांग्रेस के मंच से पहली बार चनी हुई संविधान सभा द्वारा संविधान निर्माण की मांग की गई।
- 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने व्यस्क मताधिकार के आधार पर संविधान सभा के गठन की मांग की ।
- भारतीयों की मांग को ब्रिटिश सरकार द्वारा 1940 में अगस्त प्रस्ताव के माध्यम से स्वीकार कर लिया।
- मार्च 1942 में दुसरे विश्व युद्व से उपजी परिस्थितियों के उपरान्त क्रिप्स मिशन भारत भेजा गया। जो एक सदस्य का था। इसने युद्ध के बाद भारत में उतरदायी शासन / सविधान बनाने की मांग को मानने का वचन दिया। लेकिन यहां भी 'डोमिनियम स्टेट' अवधारणा रखी गई। जिसे कांग्रेस लीग और गांधीजी ने नामंजूर कर दिया तथा गांधीजी ने इस मिशन को 'पोस्ट डेटेड चैक' की संज्ञा दी।
- भारत में शासन की अव्यवस्था को देखते हुए तत्कालिन वायसराय लार्ड वेवल ने जून 1945 में शिमला में सर्वदलीय बैठक बुलायी जो किसी भी तार्किक नतीजे पर नहीं पहुंची। इस सम्मेलन को 'शिमला सम्मेलन' या वेवल योजना के नाम से जाना जाता है।
- अंतत: मार्च 1946 में केबिनेट मिशन भारत भेजा गया जिसकी सिफारिशों के आधार पर संविधान सभा की रचना की गई ।
❈ भारतीय संविधान सभा के गठन का आधार ❈
केबिनेट मिशन योजना 1946 ➺
महत्वपूर्ण जानकारी ➤
- केबिनेट मिशन योजना के सदस्य :-
- सर पैथिक लारेन्स ( अघ्यक्ष )
- सर स्टेफर्ड क्रिम्स
- ए. वी. अलेक्जेण्डर
- उद्देश्य :-
- भारतीयों को सत्ता सौंपना ।
- भविष्य में संविधान निर्माण ।
- अंतरिम सरकार का गठन ।
- संविधान सभा के कुल प्रस्तावित सदस्य – 389
- ब्रिटिश प्रांतों के सदस्य – 292
- मुख्य कमिश्नरी क्षेत्र – 04
- देसी रियासत – 93
- मिशन के अनुसार :-
- सविधान सभा का चुनाव - जुलाई 1946 ई.
- संविधान सभा के कुल सदस्य – 389
- प्रांतों के निर्धारित सदस्य– 296 ( इसमें कांग्रेस के 208 मुस्लिम लीग के 73 एवं 15 अन्य दलों के स्वतंत्र उम्मीदवार निर्वाचित हुए )
- ब्रिटीश भारत और चीफ कमिश्नरी क्षेत्रों से सदस्यों का निर्वाचन किया गया।
- प्रांतों या देसी रियासतों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में संविधान सभा में प्रतिनिधित्व दिया प्रत्येक 10 लाख की जनसंख्या पर 1 सदस्य को चुना जाएगा।
- सदस्यों को 3 भागों में बांटा गया
- सामान्य ( 213 )
- मुस्लिम ( 79 )
- सिख(पंजाब) ( 4 )
- चार चीफ कमिश्नरी क्षेत्र - A-B-C-D
- अजमेर-मेरवाड़ा
- ब्लूचिस्तान(पाक)
- कुर्ग(कर्नाटक)
- दिल्ली
- इसी आयोग की सिफारिशों के आधार पर जुलाई 1946 में चुनाव सम्पन्न कराए गए :-
- निर्वाचित विजीत उम्मीदवारों की संख्या - 296
- कांग्रेस - 208 सीट केवल
- मुस्लिम लीग - 73 सीट
- निर्दलीय - 8 सीट
- अन्य – 7 सीट
- कांग्रेस - 208
- मुस्लिम लीग - 73
- यूनियनिस्ट - 01
- यूनियनिस्ट मुस्लिम - 01
- यूनियनिस्ट अनुसूचित - 01
- कृषक प्रजा - 01
- अनुसूचित जाति परिसंघ - 01
- सीख गैर कांग्रेसी - 01
- कम्युनिस्ट - 01
- स्वतंत्र - 08
- कैबिनेट मिशन की सिफारिशें ➤
- संविधान सभा भारत के द्वारा बनाई जाएगी ।
- संविधान सभा के सदस्य जनसंख्या के आधार पर होंगे ( लगभग 10 लाख )
- प्रत्येक समुदाय के सदस्यों का चयन एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा अनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर होगा
- सविधान बनाए जाने तक सभी दल मिलकर एक अंतरिम सरकार बनाएंगे।
❈ अन्तरीम सरकार का गठन 1946 ❈
महत्वपूर्ण जानकारी ➤
- अध्यक्ष - ( तत्कालीन वायसराय ) - लार्ड वेवल
- उपाघ्यक्ष - पं. जवाहर लाल नेहर
- 2 सितम्बर 1946 से कार्य करना प्रारम्भ किया जिसमें मुस्लिम लीग ने भाग नहीं लिया
- इस सरकार ने सदस्य संख्या नेहरू सहित 14 रखी
अंतरिम सरकार के सदस्य व उनके विभाग ➺
- पंडित जवाहर लाल नेहरु ➜ कार्यकारी परिषद् के उपाध्यक्ष, विदेश विभाग, राष्ट्रमंडल से सम्बंधित मामले
- वल्लभभाई पटेल ➜ गृह, सुचना एवं प्रसारण
- बलदेव सिंह ➜ रक्षा
- डॉ.जॉन ➜ उद्योग एवं आपूर्ति
- C.राजगोपालाचारी ➜ शिक्षा
- सी.एच.भाभा ➜ कार्य, खनन एवं शक्ति
- राजेंद्र प्रसाद ➜ खाद्य एवं कृषि
- आसफ अली ➜ रेलवे और यातायात
- जगजीवन राम ➜ मजदूरी
- लियाकत अली ➜ वित्त
- टी.टी.चुंदरीगर ➜ वाणिज्य
- अब्दुल रब नश्तर ➜ संचार
- गजान्फर अली खान ➜ स्वास्थ्य
- जोगेंद्र नाथ मंडल ➜ कानून / विधि
❈ स्वतंत्र भारत के प्रथम कैबिनेट व उनके विभाग ❈
- पंडित जवाहर लाल नेहरु ➜ प्रधानमंत्री, अतिरिक्त विषय, सामान्य सम्बन्ध, वैज्ञानिक अंनुसंथान
- वल्लभभाई पटेल ➜ गृह मंत्री ,सूचना व प्रसारण मंत्री
- बलदेव सिंह ➜ रक्षा मंत्री
- डॉ.जॉन ➜ रेलवे एवं परिवहन मंत्री
- डॉ. अबुल कलाम आजाद ➜ शिक्षा मंत्री
- सी.एच.भाभा ➜ वाणिज्य मंत्री
- राजेंद्र प्रसाद मथाई ➜ खाद्य एवं कृषि मंत्री
- आर.के. शणमुखम शेट्टी ➜ वित्त मंत्री
- जगजीवन राम ➜ श्रम मंत्री
- डॉ. B.Rअम्बेडकर ➜ कानून मंत्री
- राजकुमारी अमृत कौर ➜ स्वास्थ्य मंत्री
- रफी अहमद किदवई ➜ संचार मंत्री
- डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ➜ उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री
- वी.एन. गाडगिल ➜ कार्य, खनन एवं ऊर्जा
- संविधान सभा के चुनाव में देसी रियासतों ने भाग नहीं लिया इसलिए 93 सीटें खाली रही
- मुस्लिम लिग ने विधान सभा का बहिष्कार किया और पाक की मांग की
- 26 अक्टूबर 1946 को इस सरकार का पुर्नगठन किया गया। लीन ने 5 प्रतिनिधि इसमें शामिल किए गए।
- मार्च 1947 में माउण्ट बेटन भारत के वायसराय बने।
- माउण्ट बेटन ने 3 जुन 1947 को एक योजना प्रस्तुत की जिसे विभाजन/ माउण्ट बेटन/ जून योजना के नाम से जाना जाता है।
- इसे 18 जुलाई 1947 को ब्रिटेन के राजा ने पास कर दिया।
- इस योजना की क्रियान्विती 15 अगस्त 1947 के भारत स्वतंन्त्रता अधिनियम में हुई। इसके निम्न प्रावधान थे
- भारत को 2 डोमिनियम स्टेटों में बांटा - (1) भारत (2) पाकिस्तान
- भारत से ब्रिटीश सम्राट के सभी अधिकार हटा लिए गए।
- पुर्वी बंगाल, पश्चिमी बंगाल, सिन्ध, उत्तर-पश्चिमी सीमान्त प्रदेश तथा असम का सिलहर जिला पाकिस्तान को दे दिया गया।
- भारत का शासन जब तक संविधान का निर्माण पुर्णत न हो। 1935 के भारत शासन अधिनियम से चलाना तया किया गया।
- संविधान सभा को सम्प्रभू/ सम्प्रभूता की स्थिति प्राप्त हो गई।
- भारत का वायसराय माउण्ट बेटन बना रहा। लेकिन पाकिस्तान में गर्वनर जनरल या वायसराय मोहम्मद अली जिन्ना बनें।
- विभाजन के बाद संविधान सभा का पुनर्गठन किया गया।
❈संविधान सभा के कार्य और बैठक 1946 ❈
संविधान सभा की 3 बैठक हुई ➺
संविधान की यह अनुसूची संविधान संशोधन 1985 के द्वारा की गई।
91 वां संविधान संशोधन 2003 द्वारा संपूर्ण दल का विलय को मान्यता।
नोट ➺ यह अनुच्छेद सरकार के तीनों अंगों विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका को अपनी-अपनी हद में रहने को बाध्य करता है ताकि यह एक दूसरे के क्षेत्रों में हस्तक्षेप न करें।
1. बंदी प्रत्यक्षीकरण
शाब्दिक अर्थ ➺ वे बंदी को प्रस्तुत किए जाए ।
यह उस व्यक्ति की प्रार्थना पर जारी किया जाता है जो यह समझता है कि उसे अवैध रूप से बंदी बनाया गया है इसके द्वारा न्यायालय वंदीकरण करने वाले अधिकारी को आदेश देता है कि वह बंदी बनाए गए व्यक्ति को निश्चित स्थान और निश्चित समय के अंदर उपस्थित करें जिससे न्यायालय बंदी बनाए जाने के कारणों पर पर विचार कर सकें।
2. परमादेश
नोट ➺ राष्ट्रपति राज्यपाल के विरुद्ध ये रीट जारी नहीं की जा सकती।
यह आज्ञा पत्र सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय द्वारा निम्न न्यायालयों व अर्द्धन्यायिक न्यायधिकरणो को जारी करते हुए आदेश दिया जाता है कि इस मामले में यहां कार्रवाई न करें क्योंकि यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर है।
4. उत्प्रेषण
इसी व्यवस्था का इस्तेमाल करते हुए संसद ने सैन्य अधिनियम 1950, नौसेना अधिनियम 1950, वायु सेना अधिनियम 1950, सीमा सुरक्षा बल अधिनियम आदि बनाए है।
अनुच्छेद (34 ) ➺ सैन्य विधि के तत्व ( मार्शला मौलिक अधिकार प्रभावित )।
ये अनुच्छेद मार्शल लॉ लगने जैसी असामान्य परिस्थिति में मूल अधिकारों पर प्रतिबंध की बात करता है। दूसरे शब्दों में, जब भी भारत में कहीं भी मार्शल लॉ लागू होगा वहाँ अनुच्छेद 34 के तहत मूल अधिकारों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
मार्शल लॉ का सीधा सा मतलब होता है सामान्य प्रशासन को सेना द्वारा अपने नियंत्रण में ले लेना। ऐसा होते ही वहाँ साधारण कानून पूरी तरह से समाप्त हो जाता है और सैन्य प्रशासन को कुछ असाधारण अधिकार मिल जाते हैं। जैसे कि किसी नागरिक को मृत्युदंड देना, आदि।
अनुच्छेद (35 ) ➺
(ब) ➺ मूल अधिकारों के क्रियान्वयन के लिए रिट जारी करने के लिए उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों को छोड़कर अन्य न्यायालयों को ये शक्ति देना (अनुच्छेद 32(3) में इसकी व्यवस्था है)।
(स) ➺ सशस्त्र बलों, पुलिस बलों आदि के सदस्यों के मूल अधिकारों पर प्रतिबंध (अनुच्छेद 33 में इसकी व्यवस्था है)।
(द) ➺ किसी सरकारी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति को किसी क्षेत्र में मार्शल लॉ के दौरान किसी कृत्य हेतु क्षतिपूर्ति देना (जो कि अनुच्छेद 34 का हिस्सा है)।
नोट ➺ मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक केवल संसद जारी कर सकती है।
4➺ केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य वाद
5➺ 42 वें संविधान संशोधन 1976
6➺ मिनर्वा मिल्क बनाम भारत संघ 1980
अनुच्छेद (39-3) ➺ धन का समान वितरण।
अनुच्छेद (40) ➺ ग्राम पंचायतों का संगठन
अनुच्छेद (41) ➺ कुछ दशाओ में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार।
अनुच्छेद (42) ➺ काम की न्याय संगत मनवोचित दशाओं का तथा प्रसूति सहायता का उपबंध।
अनुच्छेद (43) ➺ राज्य कुटीर उद्योगों की स्थापना उत्तरदायित्व।
अनुच्छेद (44) ➺ नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता।
नोट ➺ भारत के गोवा राज्य में नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता लागू है।
अनुच्छेद (45) ➺ बालकों की निशुल्क अनिवार्य शिक्षा।
अनुच्छेद (46) ➺ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़े वर्गों के शैक्षणिक व आर्थिक अभिवृद्धि दायित्व।
अनुच्छेद (47) ➺ पोषाहार स्तर, जीवन स्तर को ऊंचा करने तथा लोक स्वास्थ्य का सुधार करने का राज्य का कर्तव्य।
अनुच्छेद (48) ➺ कृषि एवं पशुपालन का संगठन।
अनुच्छेद (48-1) ➺ पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्धन और वन एवं वन्य जीवो की रक्षा।
प्रमुख वाद ➺
प्रस्तावना की मुख्य बातें ➺
आर्थिक न्याय सभी व्यक्तियों के न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति (अनुच्छेद 39 जीविका के समान अवसर समान कार्य समान वेतन)
- प्रथम बैठक ➤
- तारीख - 9 दिसंबर 1946
- स्थान - संसद भवन केंद्रीय पुस्तकालय ( दिल्ली )
- अध्यक्ष डॉ सच्चिदानंद सिन्हा ( बिहार )
नोट ➺
- अस्थाई / प्रथम अध्यक्ष - अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद ( 11 दिसंबर 1946)
- उपाध्यक्ष - एचसी मुखर्जी ( पश्चिम बंगाल )
- सवैधानिक सलाहकार - बेंनगेल नरसिंह राव
- दुसरी बैठक ➤
- समय - 11 दिसंबर 1946
- स्थाई अध्यक्ष - डॉ राजेंद्र प्रसाद
- उपाध्यक्ष – H,Cमुखर्जी
- तीसरी बैठक ➤
- समय - 13 दिसंबर 1946
- कार्य - पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्तुत किया विधानसभा का कार्य शुरू हुआ।
नोट ➺
- पहली बैठक में डॉ सच्चिदानंद को अस्थाई अध्यक्ष बनाया गया ।
- उद्देश्य प्रस्ताव को 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकार किया जिसे भविष्य में संविधान की प्रस्तावना कहा गया।
- माउंटबेटन योजना 3 जुन 1947 के आधार पर भारत स्वतत्रंता अधिनियम भेजा गया जिसके द्वारा भारत को दो अधिराज्य में विभाजित कर दिया (1) भारत और (2) पाकिस्तान
- विभाजन के पहले सदस्य – 324
- विभाजन के बाद सदस्य – 299
❈ संविधान सभा के वाचन और सत्र ❈
संविधान सभा में 3 वाचन और 11 सत्र / अधिवेशन हुए ➺
- वाचन ➤
- पहला - 4 नवंबर 1948 से 9 नवंबर 1948
- दूसरा - 15 नवंबर 1948 से 7 अक्टूबर 1949
- तीसरा - 24 नवंबर 1949 से 26 नवंबर 1949
- सत्र / अधिवेशन ➤
- पहला = 9 – 23 दिसंबर 1946
- दूसरा = 20 - 25 जनवरी 1947
- तीसरा = 28 अप्रैल से 2 मई 1947
- चौथा = 14 - 31 जुलाई 1947
- पांचवा = 14 - 30 अगस्त 1947
- छठा = 27 जनवरी 1948
- सातवां = 7 नवंबर 1948 से 8 जनवरी 1949
- आठवां = 16 मई - 16 जून 1949
- नवा = 30 जुलाई - 18 सितंबर 1949
- दसवां = 6 – 7 अक्टूबर 1949
- ग्यारहवां =14 – 28 नवंबर 1949
❈ संविधान सभा द्वारा संविधान निर्माण हंतु कुछ समितियों का गठन ❈
समितियों के नाम पर उनके अध्यक्ष ➺
- जवाहर लाल नेहरू ➺ संघ शक्त् समिति (09सदस्य )
- जवाहर लाल नेहरू ➺ संविधान समिति (15 सदस्य )
- जवाहर लाल नेहरू ➺ राज्यों के लिए समिति
- सरदार पटेल ➺ राज्यों तथा रियासतों से परामर्श समिति
- सरदार पटेल ➺ मौलिक अधिकार एवं अल्पसंख्यक समिति (54 सदस्य )
- सरदार पटेल ➺ प्रान्तीय संविधान समिति ( 25 सदस्य )
- जे. बी. कृपलानी ➺ मौलिक अधिकारों पर उपसमिती
- जे. बी. कृपलानी ➺ झण्डा समिति अध्यक्ष
- राजेद्र प्रसाद ➺ राष्ट्रध्वज तद्रय
- राजेद्र प्रसाद ➺ संचालन समिति
- एस. एच. वर्धाचारियर ➺ सर्वोच्च न्यायलय से संबधित समिति
- अल्लादी कृष्णा स्वामी अरयर ➺ प्रारूप संविधान का परीक्षण करने वाली समिति
- डा. भीमराव अम्बेडकर ➺ प्रारूप समिति/ड्राफटिंग/मसौदा समिति
- एम एन बैक्टाचेलेया ➺ संविधान समीक्षा आयोग
- Dr. H C मुखर्जी ➺ अल्पसंख्यक उपसमिती
- के एम मुंशी ➺ कार्य संचालन समिति (03 सदस्य )
- राजेन्द्र प्रसाद ➺ प्रक्रिया विषयक नियमों संबंधी समिति
- राजेन्द्र प्रसाद ➺ वित्त एवं स्टाफ समिति
- बी पट्टाभि सीतारमैय्या ➺ आवास समिति
- जी.वी. मावलंकर ➺ संविधान सभा के कार्यकरण संबंधी समिति
- गोपीनाथ बारदोलोई ➺ पूर्वोत्तर सीमांत जनजातीय क्षेत्रों और आसाम के अपवर्जित और आंशिक रूप से अपवर्जित क्षेत्रों संबंधी उपसमिति
- ए.वी. ठक्कर ➺ अपवर्जित और आंशिक रूप से अपवर्जित क्षेत्रों (असम के क्षेत्रों को छोड़कर) संबंधी उपसमिति
❈ प्रारूप समिति / मसौदी / ड्राफ्टिंग कमिटी ❈
महत्वपूर्ण जानकारी ➤
- गठन - 29 अगस्त 1947
- अध्यक्ष - डॉक्टर भीमराव अंबेडकर
- सदस्य – 07
- डाॅ. बी. आर. अम्बेडकर
- अल्लादी कृष्णा स्वामी अयंगर
- एन. गोपाल स्वामी अयंगर ( मुलत: एकमात्र कांग्रेसी प्रारूप समिति सदस्य )
- कन्हैयालाल माणिक्यलाल मुशी
- एन. माधवराज -यह बी. एल. मित्तल ( स्वास्थ्य के कारण त्यागपत्र ) के स्थान पर आये थे।
- टी. टी. कृष्णामाचारी - 1948 यह डी. पी. खेतान (मृत्यु के बाद ) के स्थान पर आये थे।
- मोहम्मद सादुल्ला
❈ संविधान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी ❈
- स्वीकारा - 26 जनवरी 1950 को
- अंतिम बैठक - 24 जनवरी 1949 ( डॉ राजेंद्र प्रसाद को राष्ट्रपति चुना )
- अंतिम बैठक में सदस्य 299 ( 283 सदस्यों ने सविधान पर हस्ताक्षर करे। )
- अधिकारिक प्रतिया हिंदी व अंग्रेजी में थी ।
- लागू किया - 26 जनवरी 1950
- भारत में सर्वोच्च संविधान है संविधान ।
- संविधान बनाने में लगा समय - 2 साल 11 महीने 18 दिन
- संविधान बनाने में लगा खर्चा - 63,96,729
- संविधान बनाने में 60 देशों के संविधान का उल्लंघन किया ।
- सबसे अधिक प्रतिनिधि - संयूक्त प्रांत 55 सदस्य
- हैदराबाद रियासत का कोई भी व्यक्ति सभा में शामिल नहीं हुआ ।
- प्रथम वक्ता - डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन
- संविधान सभा में कुल 15 महिलाओं ने भाग लिया तथा 8 महिलाओं ने सविधान पर हस्ताक्षर करे।
नोट ➺ 15 महिलाए ➤
- सुचेता कृपलानी
- दकश्यानी वेलयुद्धन
- बेगम एजाज रसूल
- कमला चौधरी
- हंसा मेहता
- दुर्गाबाई देशमुख
- लीला रे
- मालती चौधरी
- पूर्णिमा बनर्जी
- राजकुमारी अमृत कौर
- एनी मसकैरिन
- सरोजिनी नायडू
- अम्मू स्वामीनाथन
- विजयलक्ष्मी पंडित
- रेनुका रॉय
- महिला अध्यक्षा - हंसा मेहता
- सचिव - के एम मुंशी
- उपाध्यक्ष - H C मुखर्जी
- संविधान का पिता - डॉक्टर भीमराव अंबेडकर
- पहली बार सविंधान की अवधारणा - स्वराज पार्टी द्वारा 1935
- संविधान में गठित कमेटियों की संख्या 13
- लागू करने के दिन की वजह 26 जनवरी 1930 में कांग्रेस आजादी के रूप में मनाया गया।
- सर्वोच्च न्यायालय का गठन एवं शक्तिया ली - अमेरिका के संविधान से
- राष्ट्रीय ध्वज अपनाया - 22 जुलाई 1947
- राष्ट्रीय गान अपनाया - 24 जून 1950
नोट ➺
- लिखा -रविन्द्र नाथ टैगोर
- पहली बार गाया - 1911 के कोलकत्ता अधिवेशन में
- अवधि - 52 सैकण्ड
- रचना - मूल बांग्ला भाषा में
- राष्ट्रीय गीत अपनाया - 24 नवंबर 1950
- लिखा - बंकिम चन्द चटर्जी
- लिया गया - आनन्द मठ से
- भाषा - मुलतः संस्कृत भाषा में
- संविधान का अंतिम प्रारूप - 4 नवंबर 1948
- सभा का सपस्ट रूपरेखा प्रस्ताव - क्रिप्स प्रस्ताव
- मूल संविधान की भाषा - अंग्रेजी
- संविधान सभा को लिखने वाला - प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ।
- संविधान सभा का चित्रकार - नंदलाल बास
- संविधान के रक्षक -सर्वोच्च न्यायालय
- शिल्पकार - भीमराव अंबेडकर
- जनक - भीमराव अंबेडकर ( भीमराव अंबेडकर को आधुनिक भारत का मनु कहा जाता है। )
- संविधान सभा में अनुसूचित जनजाति के सदस्य - 33
- विश्व का प्रथम लिखित संविधान - अमेरिका 4 मार्च 1789
- विश्व का सबसे बड़ा अलिखित संविधान - ब्रिटेन व सऊदी अरब
- एशिया का प्रथम लिखित संविधान - जापान 1860
- विश्व का सबसे छोटा लिखित संविधान - अमेरिका अ(नुच्छेद 07)
- सर्वाधिक शब्दों वाला सविधान - भारत ( शब्द 117369)
- सबसे कम शब्दों वाला संविधान - अमेरिका ( शब्द 4500 )
- सर्वाधिक समय में बना सविधान _ ऑस्ट्रेलिया ( 9 वर्ष )
- सबसे कम समय में बना सविधान - अमेरिका (4 माह )
- संविधान द्वारा मई 1949 को भारत राष्ट्रमंडल का सदस्य बना ।
- भारतीय संविधान विश्व में सबसे लंबा लिखित संविधान है।
- 15 अगस्त 1947 को भारत विभाजन उपरान्त संविधान सभा में सदस्य संख्या घटकर 324 रह गई। जिसमें 235 स्थान प्रांतों के लिए और 89 स्थान देसी राज्यों के लिए थे।
- देश विभाजन के बाद संविधान सभा का पुनर्गठन 31 अक्टूबर 1947 को क्या 31 दिसंबर 1947 को संविधान सभा में सदस्य संख्या घटकर 299 रह गई। जिसमें प्रांतीय सदस्यों की संख्या 229 एवं देसी रियासतों के सदस्यों की संख्या 70 थी
- संविधान सभा कुल बैठके - 105
- संविधान पर हस्ताक्षर करने वाला पहला व्यक्ति जवाहर लाल नेहरू था।
- संविधान संशोधन प्रक्रिया दक्षिणी अफ्रीका से ली गई है।
- 26 नवम्बर 1949 को संविधान के 15 अनुच्छेद जिसमें नागरिकता, अन्तरिम संसद तथा सक्रमणकालीन उपबंध लागु किए गए।
- भारत के संविधान की प्रस्तावना में 3 प्रकार का न्याय ( सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक) 5 प्रकार की स्वतंत्रता ( विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म एवं उपासना ) 2 प्रकार की समानता ( प्रतिष्ठा एवं अवसर) का उल्लेख किया गया है।
- भारतीय संविधान में =
- 8 अनुसूची पहले / 12 अब
- भाग - 22
- कुल अनुच्छेद – 395
- भाषाएं - 14
❈ संविधान के स्त्रोत ❈
विभिन्न देशों से संविधान में लिए गए प्रावधान ➺
- संविधान के अनुच्छेद 12 के अंतर्गत राज्य शब्द की परिभाषा प्राप्त होती है। यह परिभाषा संविधान के अन्य अनुच्छेद में प्रयुक्त राज्य शब्द पर लागू नहीं होती है अर्थात संविधान के अन्य अनुच्छेदों में भी राज्य शब्द का उपयोग किया गया है, परंतु यहां पर अनुच्छेद 12 के अंतर्गत केवल मूल अधिकारों के संदर्भ में राज्य पर चर्चा की जा रही है। अनुच्छेद 12 के अंतर्गत जिस राज्य को बताया गया है वह अपने आप में एक विशेष प्रकार का राज्य है, जो केवल मूल अधिकार के संबंध में ही राज्य है।
- अनुच्छेद 12 के अनुसार राज्य शब्द के अंतर्गत निम्नलिखित शामिल हैं-
- 1) भारत सरकार और संसद
- 2) राज्य सरकार और विधानमंडल
- 3) सभी स्थानीय प्राधिकारी
- 4) अन्य प्राधिकारी
- इकहरी नागरीकता
- विधि का शासन
- कानून के समक्ष समानता
- संसदीय शासन प्रणाली / संसदीय विशेषाधिकार
- राष्ट्रपति की सावधानिक स्थिति
- मंत्री मण्डलीय शासन
- मंत्री परिषद का सामुहिक उतरदायित्व नियत्रक एंव महालेखा परीक्षक पद का प्रावधान
- सांसदों एवं विधायकों के विशेषाधिकार
- राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति
- कलेक्टर का पद
- नौकरशाही
- विधि निर्माण प्रक्रिया
- संयुक्त राज्य अमेरिका ➤
- मौलिक अधिकार
- न्यायिक सर्वोच्चता
- न्यायिक पुनरावलोकन
- उपराष्ट्रपति का पद
- महाभियोग की प्रक्रिया
- लोकतन्त्र
- न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया
- वितीय आपातकाल(विशेष)
- संविधान का तीनों सेनाओं का सर्वोच्च कमाण्डर होना।
- कानून के समान सरंक्षण
- संघात्मक शासन के प्रावधान
- स्वतंत्रता और निष्पक्षता
- संविधान की सर्वोच्चता
- सर्वोच्च न्यायालय की व्यवस्था
- फ्रांस ➤
- गणतंत्र ( गणतंत्र से तात्पर्य भारत का राष्ट्राध्यक्ष जनता द्वारा निश्चित समय के लिए अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है, इसका पद वंशानुगत नहीं है। )
- कनाडा ➤
- संघीय शासन व्यवस्था के प्रावधान।
- अतिविशिष्ट शक्तियां केन्द्र के अधीन रखी गई है।
- युनियन ऑफ स्टेट्स शब्द की अवधारणा।
- राष्ट्रपति का सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श प्राप्त करना।
- सुदृढ़ केंद्र के व्यवस्था।
- पुर्व सोवियत संघ ( रूस ) ➤
- मौलिक कर्तव्य
- पंचवर्षीय योजनाएं
- समाजवाद
- जर्मनी ➤
- राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों के प्रावधान।
- आयरलैण्ड ➤
- राज्य के नीति निर्देशक तत्व।
- राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल की व्यवस्था।
- राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनित करना।
- दक्षिणी अफ्रीका ➤
- संविधान में संशोधन करने की प्रक्रिया।
- राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन।
- ऑस्ट्रेलिया ➤
- समवर्ती सूची।
- सविधान की प्रस्तावना।
- संसद के दोनो सदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान।
- जापान ➤
- कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया
- 1935 का भारत शासन अधिनियम ➤
- संविधान में इसका लगभग 2/3 भाग लिया गया है।
- भारतीय संविधान का सबसे बड़ा एकाकी स्त्रोत है।
- अधिवेता - आइबर जेनिंग्स - "वकीलो का स्वर्ग"
❈ भारतीय संविधान के वर्तमान अनुसूचियां ❈
नोट ➺ भारत संविधान में पहले 8 अनुसूची थी और अभी 12 है।
वर्तमान अनुसूचियां ➺
- पहली अनुसूची - भारत के राज्य व संघ राज्य क्षेत्र से संबंधित ।
- दूसरी अनुसूची - राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, लोकसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, विधान सभा, विधान परिषद के अध्यक्ष, राज्यसभा के अध्यक्ष जैसी विभिन्न पदाधिकारियों के वेतन का प्रावधान।
- तीसरी अनुसूची - संविधानिक पदाधिकारी शपथ की व्यवस्था ( राष्ट्रपति, राज्यपाल इत्यादि )
- चौथी अनुसूची - राज्यसभा में राज्यों का प्रतिनिधित्व ।
- पांचवी अनुसूची - अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण का प्रावधान।
- छठी अनुसूची - असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों में जनजातीय, आदिवासी क्षेत्र के प्रशासन के प्रावधान।
- सातवीं अनुसूची - केंद्र राज्य का शक्ति विभाजन :-
1 - संघ सूची ➤
- संविधान लागू होने के समय विषय - 97 विषय
- वर्तमान में विषय – 100 विषय
- इस सूची में विषय पर केंद्र सरकार कानून बनाती है।
2 - राज्य सूची ➤
- संविधान लागू के समय विषय – 66 विषय
- वर्तमान में विषय - 61 विषय
- इस सूची में विषय पर राज्य सरकार को मनाती है और राष्ट्रीय हित से संबंधित होने पर केंद्र सरकार भी कानून बना सकती है।
3 - समवर्ती सूची ➤
- संविधान लागू के समय विषय – 47 विषय
- वर्तमान में विषय - 52 विषय
- इसके अंतर्गत दिए गए विषयों पर केंद्र एवं राज्य दोनों सरकार कानून बना सकती है परंतु कानून के विषय समान होने से केंद्र सरकार दवारा कानून मान्य होगा।
{ 42 वें संविधान संशोधन (1976) में राज्य सूची के पांच विषय समवर्ती सूची में स्थानांतरित कर दिए। }
- आठवीं अनुसूची - 22 मान्यता प्राप्त भाषाओं की सूची।
- 21 वां संविधान संशोधन (1967) - सिंधी
- 71 वां संविधान संशोधन (1992) - नेपाली, मणिपुरी, कोंकणी
- 92वां संविधान संशोधन (2003) - मैथिली, संथाली, डोगरी, बोडो
- नौवीं अनुसूची - भूमि सुधार से संबंधित प्रावधान
- दसवीं अनुसूची - दलबदल पर कानूनी रोक।
संविधान की यह अनुसूची संविधान संशोधन 1985 के द्वारा की गई।
91 वां संविधान संशोधन 2003 द्वारा संपूर्ण दल का विलय को मान्यता।
- ग्यारहवीं अनुसूची - पंचायतों की शक्तियाँ, अधिकार और उत्तरदायित्व।
- बारहवीं अनुसूची - नगर पालिकाओं की शक्तियाँ, अधिकार और उत्तरदायित्व, शहरी स्थानीय क्षेत्र की स्वशासन संस्थानों को कार्य करने का दर्जा व 18 विषय।
❈ भारतीय संविधान के प्रमुख अनुच्छेद व उनका विवरण ❈
संविधान सभा में कुल 395 अनुच्छेद है ➺
भाग 1 : संघ और उसका राज्य क्षेत्र ➤
- अनुच्छेद 01 ➺ संघ का नाम और राज्य क्षेत्र।
- अनुच्छेद 02 ➺ नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना।
- अनुच्छेद 02 A ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 03 ➺ नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन।
- अनुच्छेद 04 ➺ पहली अनुसूची और चौथी अनुसूचियों के संशोधन तथा अनुपूरक, और पारिणामिक विषयों का उपबंध करने के लिए अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन बनाई गई विधियां।
भाग 2 : नागरिकता ➤
- अनुच्छेद 05 ➺ संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता।
- अनुच्छेद 06 ➺ पाकिस्तान से भारत को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार।
- अनुच्छेद 07 ➺ पाकिस्तान को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार।
- अनुच्छेद 08 ➺ भारत के बाहर रहने वाले भारतीय उद्भव के कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार।
- अनुच्छेद 09 ➺ विदेशी राज्य की नागरिकता, स्वेच्छा से अर्जित करने वाले व्यक्तियों का नागरिक न होना।
- अनुच्छेद 10 ➺ नागरिकता के अधिकारों को बना रहना।
- अनुच्छेद 11 ➺ संसद द्वारा नागरिकता के अधिकार का विधि द्वारा विनियमन किया जाना।
भाग 3 : मूल अधिकार ➤
- अनुच्छेद 12 ➺ राज्य की परिभाषा।
- अनुच्छेद 13 ➺ मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाली विधियां।
- अनुच्छेद 14 ➺ विधि के समक्ष समानता।
- अनुच्छेद 15 ➺ धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध।
- अनुच्छेद 16 ➺ लोक नियोजन के विषय में अवसर की समानता।
- अनुच्छेद 17 ➺ अस्पृश्यता का अंत।
- अनुच्छेद 18 ➺ उपाधियों का अंत।
- अनुच्छेद 19 ➺ वाक-स्वतंत्रता आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण।
- अनुच्छेद 20 ➺ अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण।
- अनुच्छेद 21 ➺ प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण।
- अनुच्छेद 22 ➺ कुछ दशाओं में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण।
- अनुच्छेद 23 ➺ मानव और दुर्व्यापार और बलात्श्रम का प्रतिषेध।
- अनुच्छेद 24 ➺ कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध।
- अनुच्छेद 25 ➺ अंत:करण की और धर्म की अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 26 ➺ धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 27 ➺ किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करों के संदाय के बारे में स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 28 ➺ कुल शिक्षा संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने के बारे में स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 29 ➺ अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण।
- अनुच्छेद 30 ➺ शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक-वर्गों का अधिकार।
- अनुच्छेद 31 ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 31क/A ➺ संपदाओं आदि के अर्जन के लिए उपबंध करने वाली विधियों की व्यावृत्ति।
- अनुच्छेद 31ख/B ➺ कुछ अधिनियमों और विनियमों का विधिमान्यकरण।
- अनुच्छेद 31ग/C ➺ कुछ निदेशक तत्वों को प्रभाव करने वाली विधियों की व्यावृत्ति।
- अनुच्छेद 31घ/D ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 32 ➺ इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए उपचार।
- अनुच्छेद 32A ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 33 ➺ इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों का बलों आदि को लागू होने में, उपांतरण करने की संसद की शक्ति।
- अनुच्छेद 34 ➺ जब किसी क्षेत्र में सेना विधि प्रवृत्त है तब इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों पर निर्बन्धन।
- अनुच्छेद 35 ➺ इस भाग के उपबंधों को प्रभावी करने का विधान।
भाग 4 : राज्य के नीति निदेशक तत्व ➤
- अनुच्छेद 36 ➺ परिभाषा।
- अनुच्छेद 37 ➺ इस भाग में अंतर्विष्ट तत्वों का लागू होना।
- अनुच्छेद 38 ➺ राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाएगा।
- अनुच्छेद 39 ➺ राज्य द्वारा अनुसरणीय कुछ नीति तत्व।
- अनुच्छेद 39क ➺ समान न्याय और नि:शुल्क विधिक सहायता।
- अनुच्छेद 40 ➺ ग्राम पंचायतों का संगठन।
- अनुच्छेद 41 ➺ कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार।
- अनुच्छेद 42 ➺ काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं का तथा प्रसूति सहायता का उपबंध।
- अनुच्छेद 43 ➺ कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि।
- अनुच्छेद 43क ➺ उद्योगों के प्रबंध में कार्मकारों का भाग लेना।
- अनुच्छेद 44 ➺ नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता।
- अनुच्छेद 45 ➺ बालकों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का उपबंध।
- अनुच्छेद 46 ➺ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य दुर्बल वर्गों के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की अभिवृद्धि।
- अनुच्छेद 47 ➺ पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊंचा करने तथा लोक स्वास्थ्य को सुधार करने का राज्य का कर्तव्य।
- अनुच्छेद 48 ➺ कृषि और पशुपालन का संगठन।
- अनुच्छेद 48क ➺ पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा।
- अनुच्छेद 49 ➺ राष्ट्रीय महत्व के संस्मारकों, स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण।
- अनुच्छेद 50 ➺ कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथक्करण।
- अनुच्छेद 51 ➺ अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि।
भाग 4 A : मूल कर्तव्य ➤
- अनुच्छेद 51A ➺ मूल कर्तव्य।
भाग 5 : संघ ➤
- अनुच्छेद 52 ➺ भारत के राष्ट्रपति।
- अनुच्छेद 53 ➺ संघ की कार्यपालिका शक्ति।
- अनुच्छेद 54 ➺ राष्टप्रति का निर्वाचन।
- अनुच्छेद 55 ➺ राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति।
- अनुच्छेद 56 ➺ राष्ट्रपति की पदावधि।
- अनुच्छेद 57 ➺ पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता।
- अनुच्छेद 58 ➺ राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए अर्हताएं।
- अनुच्छेद 59 ➺ राष्टप्रति के पद के लिए शर्तें।
- अनुच्छेद 60 ➺ राष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान।
- अनुच्छेद 61 ➺ राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रकिया।
- अनुच्छेद 62 ➺ राष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन करने का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति की पदावधि।
- अनुच्छेद 63 ➺ भारत का उप राष्ट्रपति।
- अनुच्छेद 64 ➺ उप राष्ट्रपति का राज्य सभा का पदेन सभापति होना।
- अनुच्छेद 65 ➺ राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या उसकी अनुपस्थिति में उप राष्टप्रति का राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना या उसके कृत्यों का निर्वहन।
- अनुच्छेद 66 ➺ उप राष्ट्रपति का निर्वाचन।
- अनुच्छेद 67 ➺ उप राष्ट्रपति की पदावधि।
- अनुच्छेद 68 ➺ उप राष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन करने का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति की पदावधि।
- अनुच्छेद 69 ➺ उप राष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान।
- अनुच्छेद 70 ➺ अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन।
- अनुच्छेद 71 ➺ राष्ट्रपति या उप राष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित या संसक्त विषयत।
- अनुच्छेद 72 ➺ क्षमता आदि की और कुछ मामलों में दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की राष्ट्रपति की शक्ति।
- अनुच्छेद 73 ➺ संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार।
- अनुच्छेद 74 ➺ राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रि-परिषद।
- अनुच्छेद 75 ➺ मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध।
- अनुच्छेद 76 ➺ भारत का महान्यायवादी।
- अनुच्छेद 77 ➺ भारत सरकार के कार्य का संचालन।
- अनुच्छेद 78 ➺ राष्ट्रपति को जानकारी देने आदि के संबंध में प्रधानमंत्री के कर्तव्य।
- अनुच्छेद 79 ➺ संसद का गठन।
- अनुच्छेद 80 ➺ राज्य सभा की संरचना।
- अनुच्छेद 81 ➺ लोक सभा की संरचना।
- अनुच्छेद 82 ➺ प्रत्येक जनगणना के पश्चात पुन: समायोजन।
- अनुच्छेद 83 ➺ संसद के सदनों की अवधि।
- अनुच्छेद 84 ➺ संसद की सदस्यता के लिए अर्हता।
- अनुच्छेद 85 ➺ संसद के सत्र, सत्रावसान और विघटन।
- अनुच्छेद 86 ➺ सदनों के अभिभाषण का और उनको संदेश भेजने का राष्टप्रति का अधिकार।
- अनुच्छेद 87 ➺ राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण।
- अनुच्छेद 88 ➺ सदनों के बारे में मंत्रियों और महान्यायवादी के अधिकार।
- अनुच्छेद 89 ➺ राज्य सभा का सभापति और उप सभापति।
- अनुच्छेद 90 ➺ उप सभापति का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना।
- अनुच्छेद 91 ➺ सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उप सभापति या अन्य व्यक्ति की शक्ति।
- अनुच्छेद 92 ➺ जब सभापति या उप सभापति को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना।
- अनुच्छेद 93 ➺ लोक सभा और अध्यक्ष और उपाध्यक्ष।
- अनुच्छेद 94 ➺ अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना, पद त्याग और पद से हटाया जाना।
- अनुच्छेद 95 ➺ अध्यक्ष के पद के कर्तव्यों को पालन करने या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यक्ति की शक्ति।
- अनुच्छेद 96 ➺ जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना।
- अनुच्छेद 97 ➺ सभापति और उप सभापति तथा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते।
- अनुच्छेद 98 ➺ संसद का सचिवालय।
- अनुच्छेद 99 ➺ सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान।
- अनुच्छेद 100 ➺ सदनों में मतदान, रिक्तियों के होते हुए भी सदनों की कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति।
- अनुच्छेद 101 ➺ स्थानों का रिक्त होना।
- अनुच्छेद 102 ➺ सदस्यता के लिए निरर्हताएं।
- अनुच्छेद 103 ➺ सदस्यों की निरर्हताओं से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय।
- अनुच्छेद 104 ➺ अनुच्छेद 99 के अधीन शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने से पहले या निरर्हित किए जाने पर बैठने और मत देने के लिए शास्ति।
- अनुच्छेद 105 ➺ संसद के सदनों की तथा उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियां, विशेषाधिकार आदि।
- अनुच्छेद 106 ➺ सदस्यों के वेतन और भत्ते।
- अनुच्छेद 107 ➺ विधेयकों के पुर: स्थापन और पारित किए जाने के संबंध में उपलबंध।
- अनुच्छेद 108 ➺ कुछ दशाओं में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक।
- अनुच्छेद 109 ➺ धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया।
- अनुच्छेद 110 ➺ “धन विधेयक” की परिभाषा।
- अनुच्छेद 111 ➺ विधेयकों पर अनुमति।
- अनुच्छेद 112 ➺ वार्षिक वित्तीय विवरण।
- अनुच्छेद 113 ➺ संसद में प्राक्कलनों के संबंध में प्रक्रिया।
- अनुच्छेद 114 ➺ विनियोग विधेयक।
- अनुच्छेद 115 ➺ अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान।
- अनुच्छेद 116 ➺ लेखानुदान, प्रत्ययानुदान और अपवादानुदान।
- अनुच्छेद 117 ➺ वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 118 ➺ प्रक्रिया के नियम।
- अनुच्छेद 119 ➺ संसद में वित्तीय कार्य संबंधी प्रक्रिया का विधि द्वारा विनियमन।
- अनुच्छेद 120 ➺ संसद में प्रयोग की जाने वाली भाषा।
- अनुच्छेद 121 ➺ संसद में चर्चा पर निर्बंधन।
- अनुच्छेद 122 ➺ न्यायालयों द्वारा संसद की कार्यवाहियों की जांच न किया जाना।
- अनुच्छेद 123 ➺ संसद के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की राष्ट्रपति की शक्ति।
- अनुच्छेद 124 ➺ उच्चतम न्यायालय की स्थापना और गठन।
- अनुच्छेद 125 ➺ न्यायाधीशों के वेतन आदि।
- अनुच्छेद 126 ➺ कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 127 ➺ तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 128 ➺ उच्चतम न्यायालय की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की उपस्थिति।
- अनुच्छेद 129 ➺ उच्चतम न्यायालय का अभिलेख न्यायालय होना।
- अनुच्छेद 130 ➺ उच्चतम न्यायालय का स्थान।
- अनुच्छेद 131 ➺ उच्चतम न्यायालय की आरंभिक अधिकारिता।
- अनुच्छेद 131क/A ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 132 ➺ कुछ मामलों में उच्च न्यायालयों से अपीलों में उच्चतम न्यायालय की अपीली अधिकारिता।
- अनुच्छेद 133 ➺ उच्च न्यायालयों में सिविल विषयों से संबंधित अपीलों में उच्चतम न्यायालय की अपीली अधिकारिता।
- अनुच्छेद 134 ➺ दांडिक विषयों में उच्चतम न्यायालय की अपीली अधिकारिता।
- अनुच्छेद 134क/A ➺ उच्चतम न्यायालय में अपील के लिए प्रमाणपत्र।
- अनुच्छेद 135 ➺ विद्यमान विधि के अधीन फेडरल न्यायालय की अधिकारिता और शक्तियों का उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य होना।
- अनुच्छेद 136 ➺ अपील के लिए उच्चतम न्यायालय की विशेष इजाजत।
- अनुच्छेद 137 ➺ निर्णयों या आदेशों का उच्चतम न्यायालयों द्वारा पुनर्विलोकन।
- अनुच्छेद 138 ➺ उच्चतम न्यायालय की अधिकारिता की वृद्धि।
- अनुच्छेद 139 ➺ कुछ रिट निकालने की शक्तियों का उच्चतम न्यायालय को प्रदत्त किया जाना।
- अनुच्छेद 139क/A ➺ कुछ मामलों का अंतरण।
- अनुच्छेद 140 ➺ उच्चतम न्यायालय की आनुषंगिक शक्तिया।
- अनुच्छेद 141 ➺ उच्चतम न्यायालय द्वारा घोषित विधि का सभी न्यायालयों पर आबद्धकर होना।
- अनुच्छेद 142 ➺ उच्चतम न्यायालय की डिक्रियों और आदेशों का प्रवर्तन और प्रकटीकरण आदि के बारे में आदेश।
- अनुच्छेद 143 ➺ उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति।
- अनुच्छेद 144 ➺ सिविल और न्यायिक प्राधिकारियों द्वारा उच्चतम न्यायालय।
- अनुच्छेद 144क/A ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 145 ➺ न्यायालय के नियम आदि।
- अनुच्छेद 146 ➺ उच्चतम न्यायालय के अधिकारी और सेवक तथा व्यय।
- अनुच्छेद 147 ➺ निर्वचन।
- अनुच्छेद 148 ➺ भारत का नियंत्रक – महा लेखापरीक्षक।
- अनुच्छेद 149 ➺ नियंत्रक महा लेखापरीक्षक के कर्तव्य और शक्तियां।
- अनुच्छेद 150 ➺ संघ के और राज्यों के लेखाओं का प्ररूप।
भाग 6 : राज्य ➤
- अनुच्छेद 151 ➺ संपरीक्षा प्रतिवेदन।
- अनुच्छेद 152 ➺ परिभाषा।
- अनुच्छेद 153 ➺ राज्यों के राज्यपाल।
- अनुच्छेद 154 ➺ राज्य की कार्यपालिका शक्ति।
- अनुच्छेद 155 ➺ राज्यपाल की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 156 ➺ राज्य की पदावधि।
- अनुच्छेद 157 ➺ राज्यपाल के पद के लिए शर्तें।
- अनुच्छेद 158 ➺ राज्यपाल के पद के लिए शर्तें।
- अनुच्छेद 159 ➺ राज्यपाल द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान।
- अनुच्छेद 160 ➺ कुछ आकस्मिकताओं में राज्यपाल के कृत्यों का निर्वहन।
- अनुच्छेद 161 ➺ क्षमा आदि की और कुछ मामलों में दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की राज्यपाल की शक्ति।
- अनुच्छेद 162 ➺ राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार।
- अनुच्छेद 163 ➺ राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रि परिषद।
- अनुच्छेद 164 ➺ मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध।
- अनुच्छेद 165 ➺ राज्य का महाधिवक्ता।
- अनुच्छेद 166 ➺ राज्य की सरकार के कार्य का संचालन।
- अनुच्छेद 167 ➺ राज्यपाल को जानकारी देने आदि के संबंध में मुख्यमंत्री के कर्तव्य।
- अनुच्छेद 168 ➺ राज्यों के विधान – मंडलों का गठन।
- अनुच्छेद 169 ➺ राज्यों में विधान परिषदों का उत्सादन या सृजन।
- अनुच्छेद 170 ➺ विधान सभाओं की संरचना।
- अनुच्छेद 171 ➺ विधान परिषदों की संरचना।
- अनुच्छेद 172 ➺ राज्यों के विधान-मंडलों की अवधि।
- अनुच्छेद 173 ➺ राज्य के विधान-मंडल की सदस्यता के लिए अर्हता।
- अनुच्छेद 174 ➺ राज्य के विधान-मंडल के सत्र, सत्रावहसान और विघटन।
- अनुच्छेद 175 ➺ सदन और सदनों में अभिभाषण का और उनको संदेश भेजने का राज्यपाल का अधिकार।
- अनुच्छेद 176 ➺ राज्यपाल का विशेष अभिभाषण।
- अनुच्छेद 177 ➺ सदनों के बारे में मंत्रियों और महाधिवक्ता के अधिकार।
- अनुच्छेद 178 ➺ विधान सभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष।
- अनुच्छेद 179 ➺ अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना।
- अनुच्छेद 180 ➺ अध्यक्ष के पद के कर्तव्यों का पालन करने या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यक्ति की शाक्ति।
- अनुच्छेद 181 ➺ जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना।
- अनुच्छेद 182 ➺ विधान परिषद का सभापति और उप सभापति।
- अनुच्छेद 183 ➺ सभापति और उप सभापति का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना।
- अनुच्छेद 184 ➺ सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उप सभापति या अन्य व्यक्ति की शक्ति।
- अनुच्छेद 185 ➺ जब सभापति या उप सभापति को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना।
- अनुच्छेद 186 ➺ अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तथ सभापति और उप सभापति के वेतन और भत्ते।
- अनुच्छेद 187 ➺ राज्य के विधान मंडल का सचिवालय।
- अनुच्छेद 188 ➺ सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान।
- अनुच्छेद 189 ➺ सदनों में मतदान, रिक्तियों के होते हुए भी सदनों की कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति।
- अनुच्छेद 190 ➺ स्थानों का रिक्त होना।
- अनुच्छेद 191 ➺ सदस्यता के लिए निरर्हताएं।
- अनुच्छेद 192 ➺ सदस्यों की निरर्हताओं से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय।
- अनुच्छेद 193 ➺ अनुच्छेद 188 के अधीन शपथ लेने या प्रतिज्ञा करने से पहले या अर्हित न होते हुए या निरर्हित किए जाने पर बैठने और मत देने के लिए शास्ति।
- अनुच्छेद 194 ➺ विधान-मंडलों के सदनों की तथा सदस्यों और समितियों की शक्तियां, विशेषधिकार आदि।
- अनुच्छेद 195 ➺ सदस्यों के वेतन और भत्ते।
- अनुच्छेद 196 ➺ विधेयकों के पुर: स्थापन और पारित किए जाने के संबंध में उपबंध।
- अनुच्छेद 197 ➺ धन विधेयकों से भिन्न विधेयकों के बारे में विधान परिषद की शक्तियों पर निर्बंधन।
- अनुच्छेद 198 ➺ धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया।
- अनुच्छेद 199 ➺ “धन विधेयक” की परिभाषा।
- अनुच्छेद 200 ➺ विधेयकों पर अनुमति।
- अनुच्छेद 201 ➺ विचार के लिए आरक्षित विधेयक।
- अनुच्छेद 202 ➺ वार्षिक वित्तीय विवरण।
- अनुच्छेद 203 ➺ विधान-मंडल में प्राक्कलनों के संबंध में प्रक्रिया।
- अनुच्छेद 204 ➺ विनियोग विधेयक।
- अनुच्छेद 205 ➺ अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान।
- अनुच्छेद 206 ➺ लेखानुदान, प्रत्ययानुदान और अपवादानुदान।
- अनुच्छेद 207 ➺ वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 208 ➺ प्रक्रिया के नियम।
- अनुच्छेद 209 ➺ राज्य के विधान-मंडल में वित्तीय कार्य संबंधी प्रक्रिया का विधि द्वारा विनियमन।
- अनुच्छेद 210 ➺ विधान मंडल में प्रयोग की जाने वाली भाषा।
- अनुच्छेद 211 ➺ विधान-मंडल में चर्चा पर निर्बंधन।
- अनुच्छेद 212 ➺ न्यायालयों द्वारा विधन मंडल की कार्यवाहियों की जांच न किया जाना।
- अनुच्छेद 213 ➺ विधान मंडल के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्याति करने की राज्यपाल की शक्त।
- अनुच्छेद 214 ➺ राज्यों के लिए उच्च न्यायालय।
- अनुच्छेद 215 ➺ उच्च न्यायालयों का अभिलेख न्यायालय होना।
- अनुच्छेद 216 ➺ उच्च न्यायालयों का गठन।
- अनुच्छेद 217 ➺ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति और उसके पद की शर्तें।
- अनुच्छेद 218 ➺ उच्चतम न्यायालय से संबंधित कुछ उपबंधों का उच्च न्यायालयों का लागू होना।
- अनुच्छेद 219 ➺ उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान।
- अनुच्छेद 220 ➺ स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात विधि-व्यवसाय पर निर्बंधन।
- अनुच्छेद 221 ➺ न्यायाधीशों के वेतन आदि।
- अनुच्छेद 222 ➺ किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय को अंतरण।
- अनुच्छेद 223 ➺ कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 224 ➺ अपर और कार्यकारी न्यायाधीशों की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 224क/A ➺ उच्च न्यायालयों की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 225 ➺ विद्यमान उच्च न्यायालयों की अधिकारिता।
- अनुच्छेद 226 ➺ कुछ रिट निकालने की उच्च न्यायालय की शक्ति।
- अनुच्छेद 226क/A ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 227 ➺ सभी न्यायालयों के अधीक्षण की उच्च न्यायालय की शक्ति।
- अनुच्छेद 228 ➺ कुछ मामलों का उच्च न्यायालय को अंतरण।
- अनुच्छेद 228क/A ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 229 ➺ उच्च न्यायालयों के अधिकारी और सेवक तथा व्यय।
- अनुच्छेद 230 ➺ उच्च न्यायालयों की अधिकारिता का संघ राज्य क्षेत्रों पर विस्तार।
- अनुच्छेद 231 ➺ दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना।
- अनुच्छेद 233 ➺ जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 233क/A ➺ कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों का और उनके द्वारा किए गए निर्णयों आदि का विधिमान्यकरण।
- अनुच्छेद 234 ➺ न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों से भिन्न व्यक्तियों की भर्ती।
- अनुच्छेद 235 ➺ अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण।
- अनुच्छेद 236 ➺ निर्वचन
- अनुच्छेद 237 ➺ कुछ वर्ग या वर्गों के मजिस्ट्रेटों पर इस अध्याय के उपबंधों का लागू होना।
भाग 7 : संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956 द्वारा निरसित ➤
- अनुच्छेद 238 ➺ [निरसन]
भाग 8 : संघ राज्य क्षेत्र ➤
- अनुच्छेद 239 ➺ संघ राज्यक्षेत्रों का प्रशासन।
- अनुच्छेद 239 क/A ➺ कुछ संघ राज्य क्षेत्रों के लिए स्थानीय विधान मंडलों या मंत्रि-परिषदों का या दोनों का सृजन।
- अनुच्छेद 239 क/A ➺ दिल्ली के संबंध में विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 239 क क/A A ➺ सांविधानिक तंत्र के विफल हो जाने की दशा में उपबंध।
- अनुच्छेद 239 क ख/ AB ➺ विधान मंडल के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की प्रशासक की शक्ति।
- अनुच्छेद 240 ➺ कुछ संघ राज्य क्षेत्रों के लिए विनियम बनाने की राष्ट्रपति की शक्ति।
- अनुच्छेद 241 ➺ संघ राज्य क्षेत्रों के लिए उच्च न्यायालय।
- अनुच्छेद 242 ➺ [निरसन]
भाग 9 : पंचायत ➤
- अनुच्छेद 243 ➺ परिभाषाएं।
- अनुच्छेद 243क/A ➺ ग्राम सभा।
- अनुच्छेद 243ख/B ➺ पंचायतों का गठन।
- अनुच्छेद 243ग/C ➺ पंचायतों की संरचना।
- अनुच्छेद 243घ/D ➺ स्थानों का आरक्षण।
- अनुच्छेद 243ड/E ➺ पंचायतों की अवधि, आदि।
- अनुच्छेद 243च/F ➺ सदस्यता के लिए निरर्हताएं।
- अनुच्छेद 243छ/G ➺ पंचायतों की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व।
- अनुच्छेद 243ज/H ➺ पंचायतों द्वारा कर अधिरोपित करने की शक्तियां और उनकी निधियां।
- अनुच्छेद 243-झ/I ➺ वित्तीय स्थिति के पुनर्विलोकन के लिए वित्त आयोग का गठन।
- अनुच्छेद 243ञ/J ➺ पंचायतों के लेखाओं की संपरीक्षा।
- अनुच्छेद 243ट/K ➺ पंचायतों के लिए निर्वाचन।
- अनुच्छेद 243ठ/L ➺ संघ राज्य क्षेत्रों को लागू होना।
- अनुच्छेद 243ड/M ➺ इस भाग का कतिपय क्षेत्रों को लागू नह होना।
- अनुच्छेद 243ढ/N ➺ विद्यमान विधियों और पंचायतों का बना रहना।
- अनुच्छेद 243-ण/O ➺ निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जन।
भाग 9 A : नगरपालिकाएं ➤
- अनुच्छेद 243त/P ➺ परिभाषाएं।
- अनुच्छेद 243थ/Q ➺ नगरपालिकाओं का गठन।
- अनुच्छेद 243द/R ➺ नगरपालिकाओं की संरचना।
- अनुच्छेद 243ध/S ➺ वार्ड समितियों, आदि का गठन और संरचना।
- अनुच्छेद 243न/T ➺ स्थानों का आरक्षण।
- अनुच्छेद 243प/U ➺ नगरपालिकाओं की अवधि, आदि।
- अनुच्छेद 243फ/V ➺ सदस्यता के लिए निरर्हताएं।
- अनुच्छेद 243ब/W ➺ नगरपालिकाओं, आदि की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व।
- अनुच्छेद 243भ/X ➺ नगरपालिकाओं द्वारा कर अधिरोपित करने की शक्ति और उनकी निधियां।
- अनुच्छेद 243म/Y ➺ वित्त आयोग।
- अनुच्छेद 243य/Z ➺ नगरपालिकाओं के लेखाओं की संपरीक्षा।
- अनुच्छेद 243यक/ZA ➺ नगरपालिकाओं के लिए निर्वाचन।
- अनुच्छेद 243यख/ZB ➺ संघ राज्यक्षेत्रों को लागू होना।
- अनुच्छेद 243यग/ZC ➺ इस भाग का कतिपय क्षेत्रों को लागू न होना।
- अनुच्छेद 243यघ/ZD ➺ जिला योजना के लिए समिति।
- अनुच्छेद 243यड/ZE ➺ महानगर योजना के लिए समिति।
- अनुच्छेद 243यच/ZF ➺ विद्यमान विधियों और नगरपालिकाओं का बना रहना।
- अनुच्छेद 243यछ/ZG ➺ निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जन।
भाग 10 : अनुसूचित और जनजाति क्षेत्र ➤
- अनुच्छेद 244 ➺ अनुसूचित क्षेत्रों और जनजाति क्षेत्रों का प्रशासन।
- अनुच्छेद 244क/A ➺ असम के कुछ जनजाति क्षेत्रों को समाविष्ट करने वाला एक स्वशासी राज्य बनाना और उसके लिए स्थानीय विधान मंडल या मंत्रि परिषद का या दोनों का सृजन।
भाग 11 : संघ और राज्यों के बीच संबंध ➤
- अनुच्छेद 245 ➺ संसद द्वारा राज्यों के विधान मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों का विस्तार।
- अनुच्छेद 246 ➺ संसद द्वारा और राज्य के विधान मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों की विषयवस्तु।
- अनुच्छेद 247 ➺ कुछ अतिरिक्त न्यायालयों की स्थापना का उपबंध करने की संसद की शक्ति।
- अनुच्छेद 248 ➺ अवशिष्ट विधायी शक्तियां।
- अनुच्छेद 249 ➺ राज्य सूची में के विषय के संबंध में राष्ट्रीय हित में विधि बनाने की संसद की शक्ति।
- अनुच्छेद 250 ➺ यदि आपात की उदघोषणा प्रवर्तन में हो तो राज्य सूची में के विषय के संबंध में विधि।
- अनुच्छेद 251 ➺ संसद द्वारा अनुच्छेद 249 और अनुच्छेद 250 के अधीन बनाई गई विधियों और राज्यों के विधान मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों में असंगति।
- अनुच्छेद 252 ➺ दो या अधिक राज्यों के लिए उनकी सहमति से विधि बनाने की संसद की शक्ति और ऐसी विधि का किसी अन्य राज्य द्वारा अंगीकार किया जाना।
- अनुच्छेद 253 ➺ अंतरराष्ट्रीय करारों को प्रभावी करने के लिए विधान।
- अनुच्छेद 254 ➺ संसद द्वारा बनाई गई विधियों और राज्यों के विधान मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों में असंगति।
- अनुच्छेद 255 ➺ सिफारिशों और पूर्व मंजूरी के बारे में अपेक्षाओं को केवल प्रक्रिया के विषय मानना।
- अनुच्छेद 256 ➺ राज्यों की ओर संघ की बाध्यता।
- अनुच्छेद 257 ➺ कुछ दशाओं में राज्यों पर संघ का नियंत्रण।
- अनुच्छेद 257क/A ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 258 ➺ कुछ दशाओं में राज्यों को शक्ति प्रदान करने आदि की संघ की शक्ति।
- अनुच्छेद 258क/A ➺ संघ को कृत्य सौंपने की राज्यों की शक्ति।
- अनुच्छेद 259 ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 260 ➺ भारत के बाहर के राज्य क्षेत्रों के संबंध में संघ की अधिकारिता।
- अनुच्छेद 261 ➺ सार्वजनिक कार्य, अभिलेख और न्यायिक कार्यवाहियां।
- अनुच्छेद 262 ➺ अंतरराज्यिक नदियों या नदी दूनों के जल संबंधी विवादों का न्यायनिर्णयन।
- अनुच्छेद 263 ➺ अंतरराज्य परिषद के संबंध में उपबंध।
भाग 12 : वित्त, सम्पत्ति, संविदाएं और वाद ➤
- अनुच्छेद 264 ➺ विधि के प्राधिकार के बिना करों का अधिरोपण न किया जाना।
- अनुच्छेद 265 ➺ विधि के प्राधिकार के बिना करों का अधिरोपण न किया जाना।
- अनुच्छेद 266 ➺ भारत और राज्यों के संचित निधियां और लोक लेखे।
- अनुच्छेद 267 ➺ आकस्मिकता निधि।
- अनुच्छेद 268 ➺ संघ द्वारा उदगृहीत किए जाने वाले किन्तु राज्यों द्वारा संगृहीत और विनियोजित किए जाने वाले शुल्क।
- अनुच्छेद 269 ➺ संघ द्वारा उदगृहीत और संगृहीत किन्तु राज्यों को सौंपे जाने वाले कर।
- अनुच्छेद 270 ➺ उदगृहीत कर और उनका संघ तथा राज्यों के बीच वितरण।
- अनुच्छेद 271 ➺ कुछ शुल्कों और करों पर संघ के प्रयोजनों के लिए अधिभार।
- अनुच्छेद 272 ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 273 ➺ जूट पर और जूट उत्पादों का निर्यात शुल्क के स्थान पर अनुदान।
- अनुच्छेद 274 ➺ ऐसे कराधान पर जिसमें राज्य हितबद्ध है, प्रभाव डालने वाले विधेयकों के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश की अपेक्षा।
- अनुच्छेद 275 ➺ कुछ राज्यों को संघ अनुदान।
- अनुच्छेद 276 ➺ वृत्तियों, व्यापारों, आजीविकाओं और नियोजनों पर कर।
- अनुच्छेद 277 ➺ व्यावृत्ति।
- अनुच्छेद 278 ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 279 ➺ “शुद्ध आगम”, आदि की गणना।
- अनुच्छेद 280 ➺ वित्त आयोग।
- अनुच्छेद 281 ➺ वित्त आयोग की सिफारिशें।
- अनुच्छेद 282 ➺ संघ या राज्य द्वारा अपने राजस्व के लिए जाने वाले व्यय।
- अनुच्छेद 283 ➺ संचित निधियों, आकस्मिकता निधियों और लोक लेखाओं में जमा धनराशियों की अभिरक्षा आदि।
- अनुच्छेद 284 ➺ लोक सेवकों और न्यायालयों द्वारा प्राप्त वादकर्ताओं की जमा राशियों और अन्य धनराशियों की अभिरक्षा।
- अनुच्छेद 285 ➺ संघ और संपत्ति को राजय के कराधान से छूट।
- अनुच्छेद 286 ➺ माल के क्रय या विक्रय पर कर के अधिरोपण के बारे में निर्बंधन।
- अनुच्छेद 287 ➺ विद्युत पर करों से छूट।
- अनुच्छेद 288 ➺ जल या विद्युत के संबंध में राज्यों द्वारा कराधान से कुछ दशाओं में छूट।
- अनुच्छेद 289 ➺ राज्यों की संपत्ति और आय को संघ और कराधार से छूट।
- अनुच्छेद 290 ➺ कुछ व्ययों और पेंशनों के संबंध में समायोजन।
- अनुच्छेद 290क/A ➺ कुछ देवस्वम निधियों की वार्षिक संदाय।
- अनुच्छेद 291 ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 292 ➺ भारत सरकार द्वारा उधार लेना।
- अनुच्छेद 293 ➺ राज्यों द्वारा उधार लेना।
- अनुच्छेद 294 ➺ कुछ दशाओं में संपत्ति, अास्तियों, अधिकारों, दायित्वों और बाध्यताओं का उत्तराधिकार।
- अनुच्छेद 295 ➺ अन्य दशाओं में संपत्ति, अास्तियों, अधिकारों, दायित्वों और बाध्यताओं का उत्तराधिकार।
- अनुच्छेद 296 ➺ राजगामी या व्यपगत या स्वामीविहीन होने से प्रोदभूत संपत्ति।
- अनुच्छेद 297 ➺ राज्य क्षेत्रीय सागर खण्ड या महाद्वीपीय मग्नतट भूमि में स्थित मूल्यवान चीजों और अनन्य आर्थिक क्षेत्र संपत्ति स्रोतों का संघ में निहित होना।
- अनुच्छेद 298 ➺ व्यापार करने आदि की शक्ति।
- अनुच्छेद 299 ➺ संविदाएं।
- अनुच्छेद 300 ➺ वाद और कार्यवाहियां।
- अनुच्छेद 300क/A ➺ विधि के प्राधिकार के बिना व्यक्तियों को संपत्ति से वंचित न किया जाना
भाग 13 : भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम ➤
- अनुच्छेद 301 ➺ व्यापार, वाणज्यि और समागम की स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 302 ➺ व्यापार, वाणज्यि और समागम पर निर्बंधन अधिरोपित करने की संसद की शक्ति।
- अनुच्छेद 303 ➺ व्यापार और वाणिज्य के संबंध में संघ और राज्यों की विधायी शक्तियों पर निर्बंधन।
- अनुच्छेद 304 ➺ राज्यों के बीच व्यापार, वाणिज्य और समागम पर निर्बंधन।
- अनुच्छेद 305 ➺ विद्यमान विधियों और राज्य के एकाधिकार का उपबंध करने वाली विधियों की व्यावृत्ति।
- अनुच्छेद 306 ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 307 ➺ अनुच्छेद 301 से अनुच्छेद 304 के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए प्राधिकारी की नियुक्ति।
भाग 14 : संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं ➤
- अनुच्छेद 308 ➺ निर्वचन।
- अनुच्छेद 309 ➺ संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की भर्ती और सेवा की शर्तें।
- अनुच्छेद 310 ➺ संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की पदावधि।
- अनुच्छेद 311 ➺ संघ या राज्य के अधीन सिविल हैसियत में नियोजित व्यक्तियों का पदच्युत किया जाना या पंक्ति में अवनत किया जाना।
- अनुच्छेद 312 ➺ अखिल भारतीय सेवाएं।
- अनुच्छेद 312क/A ➺ कुछ सेवाओं के अधिकारियों की सेवा की शर्तों में परिवर्तन करने या उन्हें प्रतिसंहृत करने की संसद की शक्ति।
- अनुच्छेद 313 ➺ संक्रमण कालीन उपबंध।
- अनुच्छेद 314 ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 315 ➺ संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग।
- अनुच्छेद 316 ➺ सदस्यों की नियुक्ति और पदावधि।
- अनुच्छेद 317 ➺ लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य का हटाया जाना और निलंबित किया जाना।
- अनुच्छेद 318 ➺ आयोग के सदस्यों और कर्मचारिवृंद की सेवा की शर्तों के बारे में विनियम बनाने की शक्ति।
- अनुच्छेद 319 ➺ आयोग के सदस्यों द्वारा ऐसे सदस्य न रहने पर पद धारण करने के सबंध में प्रतिषेध।
- अनुच्छेद 320 ➺ लोक सेवा आयोगों के कृत्य।
- अनुच्छेद 321 ➺ लोक सेवा आयोगों के कृत्यों का विस्तार करने की शक्ति।
- अनुच्छेद 322 ➺ लोक सेवा आयोगों के व्यय।
- अनुच्छेद 323 ➺ लोक सेवा आयोगों के प्रतिवेदन।
भाग 14 A : अधिकरण ➤
- अनुच्छेद 323क/A ➺ प्रशासनिक अधिकरण।
- अनुच्छेद 323ख/B ➺ अन्य विषयों के लिए अधिकरण।
भाग 15 : निर्वाचन ➤
- अनुच्छेद 324 ➺ निर्वाचनों के अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण का निर्वाचन आयोग में निहित होना।
- अनुच्छेद 325 ➺ धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर किसी व्यक्ति का निर्वाचक नामावली में सम्मिलित किए जाने के लिए अपात्र न होना और उसके द्वारा किसी विशेष निर्वाचक-नामावली में सम्मिलित किए जाने का दावा न किया जाना।
- अनुच्छेद 326 ➺ लोक सभा और राज्यों की विधान सभाओं के लिए निर्वाचनों का वयस्क मताधिकार के आधार पर होना।
- अनुच्छेद 327 ➺ विधान मंडल के लिए निर्वाचनों के संबंध में उपबंध करने की संसद की शक्ति।
- अनुच्छेद 328 ➺ किसी राज्य के विधान मंडल के लिए निर्वाचनों के संबंध में उपबंध करने की उस विधान मंडल की शक्ति।
- अनुच्छेद 329 ➺ निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जन।
- अनुच्छेद 329क/A ➺ [निरसन]
भाग 16 : कुछ वर्गों के लिए विशेष उपबंध सम्बन्ध ➤
- अनुच्छेद 330 ➺ लोक सभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण।
- अनुच्छेद 331 ➺ लोक सभा में आंग्ल भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व।
- अनुच्छेद 332 ➺ राज्यों की विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण।
- अनुच्छेद 333 ➺ राज्यों की विधान सभाओं में आंग्ल भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व।
- अनुच्छेद 334 ➺ स्थानों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व का साठ वर्ष के पश्चात न रहना।
- अनुच्छेद 335 ➺ सेवाओं और पदों के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के दावे।
- अनुच्छेद 336 ➺ कुछ सेवाओं में आंग्ल भारतीय समुदाय के लिए विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 337 ➺ आंग्ल भारतीय समुदाय के फायदे के लिए शैक्षिक अनुदान के लिए विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 338 ➺ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग।
- अनुच्छेद 338क/A ➺ राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग।
- अनुच्छेद 339 ➺ अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के बारे में संघ का नियंत्रण।
- अनुच्छेद 340 ➺ पिछड़े वर्गों की दशाओं के अन्वेषण के लिए आयोग की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 341 ➺ अनुसूचित जातियां।
- अनुच्छेद 342 ➺ अनुसूचित जनजातियां।
भाग 17 : राजभाषा ➤
- अनुच्छेद 343 ➺ संघ की राजभाषा।
- अनुच्छेद 344 ➺ राजभाषा के संबंध में आयोग और संसद की समिति।
- अनुच्छेद 345 ➺ राज्य की राजभाषा या राजभाषाएं।
- अनुच्छेद 346 ➺ एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच या किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा।
- अनुच्छेद 347 ➺ एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच या किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा।
- अनुच्छेद 348 ➺ उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में और अधिनियमों, विधेयकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा।
- अनुच्छेद 349 ➺ भाषा से संबंधित कुछ विधियां अधिनियमित करने के लिए विशेष प्रक्रिया।
- अनुच्छेद 350 ➺ व्यथा के निवारण के लिए अभ्यावेदन में प्रयोग की जाने वाली भाषा।
- अनुच्छेद 350क ➺ प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधाएं।
- अनुच्छेद 350ख ➺ भाषाई अल्पसंख्यक वर्गों के लिए विशेष अधिकारी।
- अनुच्छेद 351 ➺ हिन्दी भाषा के विकास के लिए निदेश।
भाग 18 : आपात उपबन्ध ➤
- अनुच्छेद 352 ➺ आपात की उदघोषणा।
- अनुच्छेद 353 ➺ आपात की उदघोषणा का प्रभाव।
- अनुच्छेद 354 ➺ जब आपात की उदघोषणा प्रवर्तन में है तब राजस्वों के वितरण संबंधी उपबंधों का लागू होना।
- अनुच्छेद 355 ➺ बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से राज्य की संरक्षा करने का संघ का कर्तव्य।
- अनुच्छेद 356 ➺ राज्यों सांविधानिक तंत्र के विफल हो जाने की दशा में उपबंध।
- अनुच्छेद 357 ➺ अनुच्छेद 356 के अधीन की गई उदघोषणा के अधीन विधायी शाक्तियों का प्रयोग।
- अनुच्छेद 358 ➺ आपात के दौरान अनुच्छेद 19 के उपबंधों का निलंबन।
- अनुच्छेद 359 ➺ आपात के दौरान भाग 3 द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रवर्तन का निलबंन।
- अनुच्छेद 359क ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 360 ➺ वित्तीय आपात के बारे में उपबंध।
भाग 19 : प्रकीर्ण ➤
- अनुच्छेद 361 ➺ राष्ट्रपति और राज्यपालों और राजप्रमुखों का संरक्षण।
- अनुच्छेद 361क/A ➺ संसद और राज्यों के विधान मंडलों की कार्यवाहियों की प्रकाशन का संरक्षण।
- अनुच्छेद 361ख/B ➺ लाभप्रद राजनीतिक पद पर नियुक्ति के लिए निरर्हता।
- अनुच्छेद 362 ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 363 ➺ कुछ संधियों, करारों आदि से उत्पन्न विवादों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जन।
- अनुच्छेद 363क/A ➺ देशी राज्यों के शासकों को दी गई मान्यता की समाप्ति और निजी थौलियों का अंत।
- अनुच्छेद 364 ➺ महापत्तनों और विमानक्षेत्रों के बारे में विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 365 ➺ संघ द्वारा दिए गए निदेशों का अनुपालन करने में या उनको प्रभावी करने में असफलता का प्रभाव।
- अनुच्छेद 366 ➺ परिभाषाएं।
- अनुच्छेद 367 ➺ निर्वचन।
भाग 20 : संविधान के संशोधन ➤
- अनुच्छेद 368 ➺ संविधान का संशोधन करने की संसद की शक्ति और उसके लिए प्रक्रिया।
भाग 21 : अस्थाई संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध ➤
- अनुच्छेद 369 ➺ राज्य सूची के कुछ विषयों के सबंध में विधि बनाने की संसद की इस प्रकार अस्थायी शक्ति मानो वे समवर्ती सूची के विषय हों।
- अनुच्छेद 370 ➺ जम्मू और कश्मीर राज्य के संबंध में अस्थायी उपबंध।
- अनुच्छेद 371 ➺ महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के संबंध में विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 371क/A ➺ नागालैंड राज्य के संबंध में विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 371ख/B ➺ असम राज्य के संबंध में विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 371ग/C ➺ मणिपुर राज्य के संबंध में विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 371घ/D ➺ आंध्र प्रदेश राज्य के संबंध में विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 371ड/E ➺ आंध्र प्रदेश में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना।
- अनुच्छेद 371च/F ➺ सिक्किम राज्य के संबंध में विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 371छ/G ➺ मिजोरम राज्य के संबंध में विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 371ज/H ➺ अरुणाचल प्रदेश राज्य के संबंध में विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 371-झ/I ➺ गोवा राज्य के संबंध में विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 372 ➺ विद्यमान विधियों का प्रवृत्त बने रहना और उनका अनुकूलन।
- अनुच्छेद 372क/A ➺ विधियों का अनुकूलन करने की राष्ट्रपति की शक्ति।
- अनुच्छेद 373 ➺ निवारक निरोध में रखे गए व्यक्तियों के संबंध में कुछ दशाओं में आदेश करने की राष्ट्रपति की शाक्ति।
- अनुच्छेद 374 ➺ फेडरल न्यायालय के न्यायाधीशों और फेडरल न्यायालय में या सपरिषद हिज मेजेस्टी के समक्ष लंबित कार्यवाहियों के बारे में उपबंध।
- अनुच्छेद 375 ➺ संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए न्यायालयों, प्राधिकारियों और अधिकारियों का कृत्य करते रहना।
- अनुच्छेद 376 ➺ उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के बारे में उपबंध।
- अनुच्छेद 377 ➺ भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक के बारे में उपबंध।
- अनुच्छेद 378 ➺ लोक सेवा आयोगों के बारे में उपबंध।
- अनुच्छेद 378क/A ➺ आंध्र प्रदेश विधान सभा की अवधि के बारे में विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 379-391 ➺ [निरसन]
- अनुच्छेद 392 ➺ कठिनाइयों को दूर करने की राष्ष्ट्रपति की शक्ति।
भाग 22 : संक्षिप्त नाम, प्रारम्भ, हिन्दी में प्राधिकृत पाठ और निरसन ➤
- अनुच्छेद 393 ➺ संक्षिप्त नाम।
- अनुच्छेद 394 ➺ प्रारंभ।
- अनुच्छेद 395 ➺ [निरसन]
❈ मौलिक अधिकार ❈
महत्वपूर्ण जानकारी ➤
- मौलिक अधिकार उन अधिकारों को कहा जाता है जो व्यक्ति के जीवन के लिये मौलिक होने के कारण संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये जाते हैं और जिनमें राज्य द्वारा हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
- मौलिक अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिया गया है।
- इसका वर्णन संविधान के भाग-3 में (अनुच्छेद 12 से अनुच्छेद 35) है।
नोट ➺ भाग–3 को "भारत का मैग्नाकार्टा" भी कहा जाता है। ( मूल अधिकारों का जन्मदाता)
- मौलिक अधिकारों में संशोधन हो सकता है और राष्ट्रीय आपात के दौरान (अनुच्छेद 352) जीवन एवं व्यकितिगत स्वतंत्रता ( प्राण व दैहिक स्वतंत्रता अनु. 21 ) के अधिकार को छोड़कर अन्य मौलिक अधिकारों को स्थगित किया जा सकता है।
- संविधान का सर्वाधिक आलोचित भाग – 3 ( 38 दिन संविधान सभा मे बहस )
- गोलकनाथ बनाम फ्जाब 1967 मौलिक अधिकार सर्वोच्च व संसद द्वारा संसोघनीय घोषित वाद है।
- संसद संविधान के किसी भाग में परिवर्तन करने में सक्षम तथा मूल ढांचे में संशोधन नहीं कर सकती है।
- संसद मौलिक अधिकारों में संशोधन करने में सक्षम है।
- सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों का संरक्षक है।
- मौलिक अधिकार न्याय योग्य हैं तथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समान रूप से प्राप्त होते है।
- इन अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता।
नोट ➺ मौलिक अधिकार अनुच्छेद 14 से शरू होता है लेकिन उससे पहले इस अनुच्छेद 12 मे राज्य की परिभाषा दी हुई है। ( यह परिभाषा संविधान के सिर्फ भाग 3 और भाग 4 (अनुच्छेद 36) के लिए ही है )
अनुच्छेद 12 ➺ राज्य की परिभाषा
- संविधान के अनुच्छेद 12 के अंतर्गत राज्य शब्द की परिभाषा प्राप्त होती है। यह परिभाषा संविधान के अन्य अनुच्छेद में प्रयुक्त राज्य शब्द पर लागू नहीं होती है अर्थात संविधान के अन्य अनुच्छेदों में भी राज्य शब्द का उपयोग किया गया है, परंतु यहां पर अनुच्छेद 12 के अंतर्गत केवल मूल अधिकारों के संदर्भ में राज्य पर चर्चा की जा रही है। अनुच्छेद 12 के अंतर्गत जिस राज्य को बताया गया है वह अपने आप में एक विशेष प्रकार का राज्य है, जो केवल मूल अधिकार के संबंध में ही राज्य है।
- अनुच्छेद 12 के अनुसार राज्य शब्द के अंतर्गत निम्नलिखित शामिल हैं। ➤
- भारत सरकार और संसद
- राज्य सरकार और विधानमंडल
- सभी स्थानीय प्राधिकारी
- अन्य प्राधिकारी
अनुच्छेद 13 ➺ मौलिक अधिकार अल्पीकरण / न्यायिक पुनरावलोकन / न्यायिक पुनर्विलोकन / न्यायिक पुनरीक्षा / असंगत विधियां
- अनुच्छेद 13 (1) ➺ भारतीय संविधान के लागू होने के ठीक पहले भारत में प्रचलित सभी विधियाँ उस मात्रा तक शून्य होंगी जहाँ तक कि वे संविधान भाग तीन के उपबंधों से असंगत हैं। ( संविधान की पूर्व विधियां/ अपवाद आच्छादन सिद्धांत )
- अनुच्छेद 13 (2) ➺ राज्य ऐसी कोई विधि नहीँ बनायेगा जो मूल अधिकारों को छीनती है। इस खण्ड के उल्लंघन में बनाई गई प्रत्येक विधि उल्लंघन की मात्रा तक शून्य होगी। ( पृथक्करण का नियम )
- अनुच्छेद 13 (3) ➺ विधि के अंतर्गत भारत में विधि के समान कोई अध्यादेश, आदेश, उपविधि, नियम, उपनियम, अधिसूचना, रूढ़ि व प्रथा आते हैं अर्थात इनमें से किसी के भी द्वारा मूल अधिकारों का उल्लंघन होता है तो उन्हें न्यायालय में रिट के द्वारा चुनौती दी जा सकती है।
- अनुच्छेद 13 (4) ➺ यह खण्ड "संविधान के 24 वें संशोधन" द्वारा जोड़ा गया है। इसके अनुसार इस अनुच्छेद की कोई बात अनुच्छेद 368 के अधीन किये गए संविधान संशोधन को लागू नहीं होगी।
नोट ➺ यह अनुच्छेद सरकार के तीनों अंगों विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका को अपनी-अपनी हद में रहने को बाध्य करता है ताकि यह एक दूसरे के क्षेत्रों में हस्तक्षेप न करें।
मौलिक अधिकार अन्य महत्वपूर्ण जानकारी ➤
- संविधान में अनुच्छेद 13, 32 व 226 के द्वारा उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय को न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति दी गई है। कुछ प्रावधानों को न्यायिक पुनर्विलोकन से बाहर रखा गया है।
नोट ➺ 1931 ई. में कराची अधिवेशन ( अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल ) में कांग्रेस ने घोषणा पत्र में मूल अधिकारों की मांग की । मूल अधिकारों का प्रारूप जवाहरलाल नेहरू ने बनाया था।
- अनु. 15, 16, 19, 29, 30 मौलिक अधिकार केवल भारतीयों को प्राप्त है।
- वर्तमान में छह मौलिक अधिकार हैं।
❈ छह मौलिक अधिकार ❈
- समता या समानता का अधिकार ( अनु–14 से 18
- स्वतंत्रता का अधिकार ( अनु–19 से 22 )
- शोषण के विरुद्ध अधिकार ( अनु–23 से 24 )
- धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार ( अनु–25 से 28 )
- संस्कृति और शिक्षा संबधी अधिकार ( अनु–29 से 30 )
- संवैधानिक उपचारों का अधिकार ( अनु–32 )
✢ 1. समता या समानता का अधिकार ✢
अनुच्छेद (14) ➺ विधि के समक्ष समता ( ब्रिटेन )और विधियों का सामान संरक्षण ( अमेरिका )
- राज्य सभी व्यक्तियों के लिए एकसमान कानून बनाएगा और उन पर एकसमान लागू करेगा।
अनुच्छेद (15) ➺ राज्य द्वारा धर्म, जाति, लिंग और जन्म स्थान आदि के आधार पर भेदभाव का निषेध
- राज्य के द्वारा धर्म, मूल, वंश, जाति, लिंग एवं जन्म स्थान आदि के आधार पर नागरिकों के प्रति जीवन के किसी भी क्षेत्र में भेदभाव नहीं किया जाएगा।
अनुच्छेद (16) ➺ लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता
- राज्य के अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति से संबंधित विषयों में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समानता होगी।
अनुच्छेद (17) ➺ अस्पृश्यता का अंत
- अस्पृश्यता अपराध अधिनियम ( 1955 )
- नागरिक अधिकार एक्ट ( 1976 )
- अनुसूचित जाति आयोग का गठन ( अनुच्छेद 338 )
- अस्पृश्यता के उन्मूलन के लिए दंडनीय अपराध घोषित
अनुच्छेद (18) ➺ उपाधियों का अंत
- राज्य, सेना या विद्या संबंधी सम्मान के सिवाय और कोई उपाधि प्रदान नहीं करेगा।
- भारत का कोई नागरिक किसी अन्य देश से बिना राष्ट्रपति की आज्ञा के कोई उपाधि स्वीकार नहीं कर सकता।
अपवाद ➺ शिक्षा और सेना
नोट ➺ भारत सरकार द्वारा भारत रतन, पदम विभूषण, पदम भूषण, पदम श्री एवं सेना द्वारा परमवीर चक्र, महावीर चक्र, वीर चक्र आदि पुरस्कार अनुच्छेद 18 के तहत ही दिए जाते हैं ।
✢ 2. स्वतंत्रता का अधिकार ✢
अनुच्छेद (19) ➺ अनुच्छेद 31 और अनुच्छेद 19f
- मूल संविधान में सात मौलिक अधिकार थे, लेकिन 44वें संविधान संशोधन (1978 ई०) के द्वारा संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 31 और अनुच्छेद 19f) को मौलिक अधिकार की सूची से हटाकर इसे संविधान के अनुच्छेद 300 (a) के अन्तगर्त क़ानूनी अधिकार के रूप में रखा गया।
अनुच्छेद (20) ➺ अपराधों के लिए दोष सिद्धि के संबंध में संरक्षण।
- इसके तहत तीन प्रकार की स्वतंत्रता का वर्णन है ।
- किसी भी व्यक्ति को एक अपराध के लिए सिर्फ एक बार सजा मिलेगी।
- अपराध करने के समय जो कानून के तहत सजा मिलेगी ने के पहले और बाद में बनने वाले कानून के तहत।
- किसी भी व्यक्ति को स्वयं के विरुद्ध न्यायालय में गवाही देने के लिए मध्य बाध्य नहीं किया जाएगा।
अनुच्छेद (21 क ) ➺ 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार ( 86 वें संविधान संशोधन 2002 )
- 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार।
अनुच्छेद (22 ) ➺ किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी से संरक्षण।
नोट ➺
- गिरफ्तारी का कारण जानने का अधिकार व वकील से परामर्श करने का अधिकार {अनुच्छेद 22 (1) }
- 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करने का अधिकार { अनुच्छेद 22 (2) }
निवारक निरोध भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22 के खंड 3 4 5 और 6 मे तत्संबंधी प्रावधानों का उल्लेख है।
निवारक निरोध कानून के अंतर्गत किसी व्यक्ति को अपराध करने से पहले ही गिरफ्तार किया जाता है निवारक निरोध का उद्देश्य व्यक्ति को अपराध के लिए दंड देना नहीं उसे अपराध करने से रोकना है जब किसी व्यक्ति को निवारक निरोध की किसी विधि के दिन गिरफ्तार किया जाता है तब सरकार ऐसे व्यक्ति को केवल 3 महीने तक अभिरक्षा में निरुद्ध कर सकती है यदि गिरफ्तार व्यक्ति को 3 माह से अधिक समय के लिए निरोध करना होता है तो इसके लिए सलाहकार बोर्ड का प्रतिवेदन प्राप्त करना पड़ता है।
❈ निवारक निरोध से संबंधित अब तक बनाई गई विधियां ❈
निवारक निरोध अधिनियम 1950 ➺
- भारत के संसद ने 26 जनवरी 1950 ईस्वी को पहला निवारक निरोध अधिनियम पारित किया था इसका उद्देश्य राष्ट्र विरोधी तत्वों को भारत की प्रतिरक्षा के प्रति रक्षा के प्रतिकूल कार्य से रोकना था इसे 1 अप्रैल 1951 ईस्वी को समाप्त हो जाता किंतु समय समय पर इसका जीवनकाल बढ़ाया गया अत: 31 दिसंबर 1971 को समाप्त हुआ।
आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम 1971 ➺
- 44 वें संवैधानिक संशोधन 1979 इसके प्रतिकूल था और इस कारण अप्रैल 1979 ईस्वी में समाप्त हो गया।
विदेशी मुद्रा सरंक्षण व तस्करी निरोधक अधिनियम 1974 ➺
- पहले इसमें तस्करों के लिए नजरबंदी की अवधि 1 वर्ष थी जिसे 13 जुलाई 1984 को एक अध्यादेश के द्वारा बढ़ाकर 2 वर्ष कर दिया गया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 ➺
- जम्मू कश्मीर के अतिरिक्त अन्य सभी राज्यों में लागू किया गया।
आंतकवादी एवं विध्वंसकारी गतिविधियां निरोधक कानून ( टाडा ) ➺
- निवारक निरोध व्यवस्था के अंतर्गत अब तक जो कानून बने उनमें यह सबसे अधिक प्रभावी को सर्वाधिक कठोर कानून था 23 मई 1995 ईस्वी को इसे समाप्त कर दिया गया।
पोटो ( prevention of terrorism ordinance 2001 ) ➺
- इसे 25 अक्टूबर 2001 को लागू किया गया। पोटो टाडा का ही एक रूप है इसके अंतर्गत कुल 23 आंतकवादी गुटों को प्रतिबंधित किया गया आंतकवादी और आंतकवादी से संबंधित सूचना को छिपाने वालों को दंड देने का प्रावधान किया गया। पुलिस शक के आधार पर किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है किंतु बिना आरोप पत्र के 3 माह से अधिक हिरासत में नहीं रख सकती। पोटा के अंतर्गत गिरफ्तार व्यक्ति हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से अपील कर सकता है लेकिन यह अपील भी गिरफ्तारी के 3 माह बाद ही हो सकती है पोटो 28 मार्च 2002 को अधिनियम बनने के बाद पोटा एक्ट हो गया । 21 सितंबर 2004 को अध्यादेश के द्वारा समाप्त कर दिया गया।
✢ 3. शोषण के विरुद्ध अधिकार ✢
अनुच्छेद (23 ) ➺ मानव के दुर्व्यपार और बलात श्रम का प्रतिषेध ।
- इसके द्वारा किसी व्यक्ति की खरीद बिक्री, बेगारी तथा इसी प्रकार का अन्य जबरदस्ती लिया हुआ श्रम निषेध ठहराया गया जिस का उल्लंघन विधि के अनुसार दंडनीय अपराध है।
नोट ➺ जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय सेवा करने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
अनुच्छेद (24 ) ➺ बालकों के नियोजन का प्रतिषेध।
- 14 वर्ष से कम आयु वाले किसी बच्चे को पर खाना खाना या अन्य किसी जोखिम भरे काम पर नियुक्त नहीं किया जा सकता है ( बाल श्रम उन्मूलन अधिनियम 1986 )
✢ 4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार ✢
अनुच्छेद (25 ) ➺ अंत:करण की और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता।
- संविधान के अनुच्छेद 25(1) के अनुसार भारत में प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी धर्म को मानने का, आचरण करने का तथा धर्म का प्रचार करने की स्वतंत्रता है।
अनुच्छेद (26 ) ➺ धार्मिक संस्थाओं की स्थापना और प्रबंध की स्वतंत्रता।
- प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय या उपसंप्रदाय को धार्मिक संस्थाओं की स्थापना करने का, धार्मिक कार्यों के प्रबंध करने का, धार्मिक प्रयोजनों के लिए संपत्ति अर्जित करने और नियम के अनुसार उसके प्रशासन का अधिकार है।
अनुच्छेद (27 ) ➺ धर्म विशेष की वृद्धि के लिए कर देने की बाध्यता का निषेध।
- राज्य किसी नागरिक को किसी धर्म विशेष की अभिवृद्धि और पोषण के लिए कर देने के लिए बाध्य नहीं करेगा।
अनुच्छेद (28 ) ➺ कुछ शिक्षण संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना की स्वतंत्रता।
- शासकीय निधि से पूर्णतः पोषित शिक्षण संस्थानों में कोई धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी। अनुदान या सहायता प्राप्त अंशत: पोषित शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा दी जा सकती है लेकिन उसमें विद्यार्थी की सहमति आवश्यक है। यदि विद्यार्थी अल्पवस्यक है तब उसके पालक या संरक्षक की सहमति जरूरी है।
✢ 5. शिक्षा व संस्कृति का अधिकार ✢
अनुच्छेद (29 ) ➺ अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण।
- कोई भी अल्पसंख्यक वर्ग अपनी भाषा लिपि और संस्कृति को सुरक्षित रख सकता है और केवल भाषा जाति धर्म और संस्कृति के आधार पर उसे किसी भी सरकारी शैक्षणिक संस्था में प्रवेश से नहीं रोका जाएगा।
अनुच्छेद (30 ) ➺ शिक्षण संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार।
- कोई भी अल्पसंख्यक वर्ग अपनी पसंद का शैक्षणिक संस्था चला सकता है वह सरकार उसे अनुदान देने में किसी तरह का भेदभाव नहीं करेगी।
✢ 6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार ✢
अनुच्छेद (32 ) ➺ अनुच्छेद 32 इसके अंतर्गत मौलिक अधिकारों को परिवर्तित कराने के लिए समुचित कार्रवाई द्वारा उच्चतम न्यायालय में आवेदन करने का अधिकार प्रदान किया गया है इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय को 5 तरह के समावेश निकालने की शक्ति प्रदान की है।
शाब्दिक अर्थ ➺ वे बंदी को प्रस्तुत किए जाए ।
यह उस व्यक्ति की प्रार्थना पर जारी किया जाता है जो यह समझता है कि उसे अवैध रूप से बंदी बनाया गया है इसके द्वारा न्यायालय वंदीकरण करने वाले अधिकारी को आदेश देता है कि वह बंदी बनाए गए व्यक्ति को निश्चित स्थान और निश्चित समय के अंदर उपस्थित करें जिससे न्यायालय बंदी बनाए जाने के कारणों पर पर विचार कर सकें।
2. परमादेश
शाब्दिक अर्थ ➺ हम आदेश देते हैं ।
जब कोई पदाधिकारी अपने सार्वजनिक कर्तव्य का निर्वाह नहीं करता है इस प्रकार के आज्ञा पत्र के आधार पर पदाधिकारी को उसके कर्तव्य का पालन करने का आदि का आदेश जारी किया जाता है।
नोट ➺ राष्ट्रपति राज्यपाल के विरुद्ध ये रीट जारी नहीं की जा सकती।
3. प्रतिषेध लेख
शाब्दिक अर्थ ➺ रोकना ।
यह आज्ञा पत्र सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय द्वारा निम्न न्यायालयों व अर्द्धन्यायिक न्यायधिकरणो को जारी करते हुए आदेश दिया जाता है कि इस मामले में यहां कार्रवाई न करें क्योंकि यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर है।
4. उत्प्रेषण
शाब्दिक अर्थ ➺ प्रमाणित होना।
इसके द्वारा अधीनस्थ न्यायालयो को यह निर्देश दिया जाता है कि वह अपने पास लंबित मुकदमों को न्याय निर्णय के लिए उससे वरिष्ठ न्यायलय को भेजे।
5. अधिकार पृच्छा
इसके द्वारा अधीनस्थ न्यायालयो को यह निर्देश दिया जाता है कि वह अपने पास लंबित मुकदमों को न्याय निर्णय के लिए उससे वरिष्ठ न्यायलय को भेजे।
5. अधिकार पृच्छा
शाब्दिक अर्थ ➺ प्राधिकृत या वारंट के द्वारा।
जब कोई व्यक्ति ऐसे पदाधिकारी के रूप में कार्य करने लगता है जिस के रूप में कार्य करने का उसे वैधानिक रूप से अधिकार नहीं है तो नयालय लअधिकार पृच्छा के आधार द्वारा उस व्यक्ति से पूछता है कि वह किस अधिकार से कार्य कर रहा है और जब तक वह इस बात का संतोषजनक उत्तर नहीं देता तब तक अधिकारी नहीं कर सकता।
अनुच्छेद (33 ) ➺ अर्ध सैनिक बलों के मौलिक अधिकार।
जब कोई व्यक्ति ऐसे पदाधिकारी के रूप में कार्य करने लगता है जिस के रूप में कार्य करने का उसे वैधानिक रूप से अधिकार नहीं है तो नयालय लअधिकार पृच्छा के आधार द्वारा उस व्यक्ति से पूछता है कि वह किस अधिकार से कार्य कर रहा है और जब तक वह इस बात का संतोषजनक उत्तर नहीं देता तब तक अधिकारी नहीं कर सकता।
अनुच्छेद (33 ) ➺ अर्ध सैनिक बलों के मौलिक अधिकार।
संसद को यह अधिकार देता है कि वह सशस्त्र बलों (Armed forces), अर्ध-सैनिक बलों (Paramilitary forces), पुलिस बलों (Police forces), खुफिया एजेंसी (intelligence Agency) एवं अन्य के मूल अधिकार पर युक्तियुक्त प्रतिबंध (Reasonable Restriction) लगा सकें।
इसी व्यवस्था का इस्तेमाल करते हुए संसद ने सैन्य अधिनियम 1950, नौसेना अधिनियम 1950, वायु सेना अधिनियम 1950, सीमा सुरक्षा बल अधिनियम आदि बनाए है।
अनुच्छेद (34 ) ➺ सैन्य विधि के तत्व ( मार्शला मौलिक अधिकार प्रभावित )।
ये अनुच्छेद मार्शल लॉ लगने जैसी असामान्य परिस्थिति में मूल अधिकारों पर प्रतिबंध की बात करता है। दूसरे शब्दों में, जब भी भारत में कहीं भी मार्शल लॉ लागू होगा वहाँ अनुच्छेद 34 के तहत मूल अधिकारों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
मार्शल लॉ का सीधा सा मतलब होता है सामान्य प्रशासन को सेना द्वारा अपने नियंत्रण में ले लेना। ऐसा होते ही वहाँ साधारण कानून पूरी तरह से समाप्त हो जाता है और सैन्य प्रशासन को कुछ असाधारण अधिकार मिल जाते हैं। जैसे कि किसी नागरिक को मृत्युदंड देना, आदि।
अनुच्छेद (35 ) ➺
भाग तृतीय ➺ संसद को प्रभावी बनाने की शक्ति।
सिर्फ संसद को यह शक्ति होगी कि
सिर्फ संसद को यह शक्ति होगी कि
(1) जिन विषयों के लिए अनुच्छेद 16(3), अनुच्छेद 32(3), अनुच्छेद 33 और अनुच्छेद 34 के अधीन संसद विधि द्वारा उपबंध कर सकेगी उनमें से किसी के लिए, और
(2) ऐसे कार्यों के लिए, जो इस भाग के अधीन अपराध घोषित किए गए है, दंड विहित करने के लिए, विधि बनाए।
कहने का अर्थ है कि अनुच्छेद 35 केवल संसद को कुछ विशेष मूल अधिकारों को प्रभावी बनाने के लिए कानून बनाने कि शक्ति प्रदान करता है। जैसे कि –
(अ) ➺ राज्य, केंद्र या किसी भी प्राधिकरण में किसी रोजगार या नियुक्ति के लिए निवास की व्यवस्था करना (अनुच्छेद 16(3) में इसकी व्यवस्था है)।
कहने का अर्थ है कि अनुच्छेद 35 केवल संसद को कुछ विशेष मूल अधिकारों को प्रभावी बनाने के लिए कानून बनाने कि शक्ति प्रदान करता है। जैसे कि –
(अ) ➺ राज्य, केंद्र या किसी भी प्राधिकरण में किसी रोजगार या नियुक्ति के लिए निवास की व्यवस्था करना (अनुच्छेद 16(3) में इसकी व्यवस्था है)।
(ब) ➺ मूल अधिकारों के क्रियान्वयन के लिए रिट जारी करने के लिए उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों को छोड़कर अन्य न्यायालयों को ये शक्ति देना (अनुच्छेद 32(3) में इसकी व्यवस्था है)।
(स) ➺ सशस्त्र बलों, पुलिस बलों आदि के सदस्यों के मूल अधिकारों पर प्रतिबंध (अनुच्छेद 33 में इसकी व्यवस्था है)।
(द) ➺ किसी सरकारी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति को किसी क्षेत्र में मार्शल लॉ के दौरान किसी कृत्य हेतु क्षतिपूर्ति देना (जो कि अनुच्छेद 34 का हिस्सा है)।
नोट ➺ मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक केवल संसद जारी कर सकती है।
✢ मौलिक अधिकारों में संशोधन ✢
1➺ गोकलनाथ बनाम पंजाब राज्य ( 1967 )गोकलनाथ बनाम पंजाब राज्य के मिलने से पूर्व दिए गए निर्णयों में यह निर्धारित किया गया था कि संविधान के किसी भी भाग में संशोधन किया जा सकता है जिसमें अनुच्छेद 368 एवं मूल अधिकारों को शामिल किया गया था।
2➺ सर्वोच्च न्यायालय ने गोकुलनाथ बनाम पंजाब राज्य वाद 1967
सर्वोच्च न्यायालय ने गोकुलनाथ बनाम पंजाब राज्य वाद 1967 के निर्णय में अनुच्छेद 368 में निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से मूल अधिकारों में संशोधन पर रोक लगा दी ।
3➺ 24 वें संविधान संशोधन 1971
24 वें संविधान संशोधन 1971द्वारा अनुच्छेद 13 और 368 में निर्धारित किया गया कि अनुच्छेद 368 में दी गई प्रक्रिया द्वारा मूल अधिकारों में संशोधन किया जा सकता है।
4➺ केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य वाद
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य वाद के निर्णय द्वारा केसवानंद बनाम पंजाब राज्य के निर्णय को निरस्त कर दिया।
5➺ 42 वें संविधान संशोधन 1976
42 वें संविधान संशोधन 1976द्वारा अनुच्छेद 368 में खंड 4 और 5 जोड़े गए तथा व्यवस्था की गई कि इस प्रकार किए गए संशोधन को किसी न्यायालय में पर प्रश्नगत नहीं किया जा सकता है।
6➺ मिनर्वा मिल्क बनाम भारत संघ 1980
मिनर्वा मिल्क बनाम भारत संघ 1980 के निर्णय के द्वारा यह निर्धारित किया गया कि संविधान के आधारभूत लक्षणों की रक्षा करने का अधिकार न्यायालय को है और न्यायालय इस आधार पर किसी भी संशोधन का पुनरावलोकन कर सकता है। इसके द्वारा 42 वें संविधान संशोधन द्वारा की गई व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया गया।
✢ राज्य के नीति निर्देशक तत्व ✢
- राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत का वर्णन संविधान के भाग 4 में अनुच्छेद 36 से 51 तक किया गया है।
- नीति निर्देशक तत्व आयरलैंड के संविधान से लिए गए हैं।
- नीति निर्देशक तत्वों का मुख्य उद्देश्य लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है।
- नीति निर्देशक तत्व का स्वरूप है सकारात्मक, वाद योग्य नहीं, राज्य के आदर्श।
- संविधान सभा में नीति निर्देशक तत्व सर्वप्रथम प्रस्तुत बी एन राव ने किए ( तेज बहादुर सप्रू समिति )
- भविष्यपक्षी
- राज्य के लक्ष्य, कर्तव्य और आदर्श
- सामाजिक आर्थिक लोकतंत्र स्थापना
- वाद योग्य नहीं
- उदारवाद, समाजवाद, गांधीवाद का समन्वय
- साध्य और व्यापक
- लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना
- आइवर जेनिंग्स ➺ पुण्य आत्मा, नैतिक आकांक्षा, फेबियन समाजवाद संज्ञा।
- पंडित जवाहरलाल नेहरू ➺ समाज के समाजवादी ढांचे की स्थापना संज्ञा वर्णित पुस्तक (भारत की खोज)
- के टी शाह ➺ ऐसा चेक की संज्ञा जो बैंक की सुविधा अनुसार अदा किया जाएगा।
- के सी व्येहर ➺ लक्ष्य व आकांक्षाओं के घोषणा पत्र।
- आस्टिंग ➺ सामाजिक क्रांति संज्ञा।
- के एम पाणिक्कर ➺ आर्थिक क्षेत्र में समाजवाद की स्थापना करते हैं।
- अंबेडकर ➺ आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना की।
- पायली ➺ नागरिकों के प्रति राज्य का सकारात्मक दायित्व है।
नीति निर्देशक तत्वों का वर्गीकरण ➺
- राजनैतिक नीतियों के संबंध में तत्व ➺ अनु. 40,44,50,51
- सामाजिक नीति से संबंधित तत्व ➺ अनु. 46
- आर्थिक नीति से संबंधित तत्व ➺ अनु. 39 ख, 42, 43,48
- शिक्षा से संबंधित तत्व ➺ अनु. 45, 49
- स्वास्थ्य एवं पर्यावरण से संबंधित तत्व ➺ अनु. 47, 48
विचारधारा के आधार पर नीति निर्देशक तत्वों का वर्गीकरण ➺
तीन का समन्वय ➺
अनुच्छेद (36 ) ➺ नीति निर्देशक तत्व ( राज्य की परिभाषा )
अनुच्छेद (37 ) ➺ नीति निर्देशक तत्व शासन की नीति निर्धारण के आधारभूत अंग है वाद योग्य नहीं है।
अनुच्छेद (38-1 ) ➺ राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास ( सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक राज्य की स्थापना )
अनुच्छेद (38-2) ➺आय की असमानता को कम करने का प्रयास ( 44 वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया )
अनुच्छेद (39) ➺
तीन का समन्वय ➺
- समाजवादी विचारधारा अनु. 38,39, 39ए, 41 ,42, 43ए
- गांधीवादी विचारधारा अनु. 40, 43, 46, 47, 48
- उदारवादी विचारधारा अनु. 44, 45 ,49 ,50, 51
अनुच्छेद (36 ) ➺ नीति निर्देशक तत्व ( राज्य की परिभाषा )
अनुच्छेद (37 ) ➺ नीति निर्देशक तत्व शासन की नीति निर्धारण के आधारभूत अंग है वाद योग्य नहीं है।
अनुच्छेद (38-1 ) ➺ राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास ( सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक राज्य की स्थापना )
अनुच्छेद (38-2) ➺आय की असमानता को कम करने का प्रयास ( 44 वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया )
अनुच्छेद (39) ➺
- पुरुष व स्त्री सभी नागरिकों को समान रूप से जीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त करने का दायित्व।
- सामूहिक हितों को प्राथमिकता।
- धन के केंद्रीकरण पर रोक
- पुरुष और स्त्री दोनों को समान कार्य के लिए समान वेतन।
- पुरुष और स्त्री कामगारों स्वास्थ्य, बालकों की सुकुमार अवस्था बरकरार रहे।
- बालकों को स्वतंत्र एवं गरिमा पूर्ण वातावरण स्वस्थ विकास ( 42 वें संशोधन )
अनुच्छेद (39-2) ➺ सार्वजनिक धन की स्वामित्व तथा नियंत्रण इस प्रकार करना ताकि सार्वजनिक हित का सर्वोत्तम साधन हो सके।
अनुच्छेद (39-3) ➺ धन का समान वितरण।
अनुच्छेद (40) ➺ ग्राम पंचायतों का संगठन
अनुच्छेद (41) ➺ कुछ दशाओ में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार।
अनुच्छेद (42) ➺ काम की न्याय संगत मनवोचित दशाओं का तथा प्रसूति सहायता का उपबंध।
अनुच्छेद (43) ➺ राज्य कुटीर उद्योगों की स्थापना उत्तरदायित्व।
अनुच्छेद (44) ➺ नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता।
नोट ➺ भारत के गोवा राज्य में नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता लागू है।
अनुच्छेद (45) ➺ बालकों की निशुल्क अनिवार्य शिक्षा।
अनुच्छेद (46) ➺ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़े वर्गों के शैक्षणिक व आर्थिक अभिवृद्धि दायित्व।
अनुच्छेद (47) ➺ पोषाहार स्तर, जीवन स्तर को ऊंचा करने तथा लोक स्वास्थ्य का सुधार करने का राज्य का कर्तव्य।
अनुच्छेद (48) ➺ कृषि एवं पशुपालन का संगठन।
अनुच्छेद (48-1) ➺ पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्धन और वन एवं वन्य जीवो की रक्षा।
अनुच्छेद (49) ➺ राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों स्थानों पर वस्तुओं का सरंक्षण।
अनुच्छेद (50) ➺ कार्यपालिका न्यायपालिका का पृथक्करण।
अनुच्छेद (51) ➺ अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा में अभिवृद्धि ( विदेश नीति )
नोट ➺ इन अनुच्छेदों के अतिरिक्त कुछ ऐसे अनुच्छेद भी हैं जो राज्य के लिए निर्देशक सिद्धांत के रूप में कार्य करते हैं जैसे ➺
अनुच्छेद (350-1) ➺ प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा देना
अनुच्छेद (351) ➺ हिंदी को प्रोत्साहन देना।
मौलिक अधिकार एवं नीति निर्देशक सिद्धांत में अंतर ➺
नीति निर्देशक सिद्धांत ➺
अनुच्छेद (50) ➺ कार्यपालिका न्यायपालिका का पृथक्करण।
अनुच्छेद (51) ➺ अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा में अभिवृद्धि ( विदेश नीति )
नोट ➺ इन अनुच्छेदों के अतिरिक्त कुछ ऐसे अनुच्छेद भी हैं जो राज्य के लिए निर्देशक सिद्धांत के रूप में कार्य करते हैं जैसे ➺
अनुच्छेद (350-1) ➺ प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा देना
अनुच्छेद (351) ➺ हिंदी को प्रोत्साहन देना।
मौलिक अधिकार एवं नीति निर्देशक सिद्धांत में अंतर ➺
नीति निर्देशक सिद्धांत ➺
- यह आइलैंड के संविधान से लिया गया है ।
- इसका वर्णन संविधान के भाग 4 में किया गया है ।
- इसे लागू कराने के लिए न्यायलय नहीं जाया जा सकता ।
- यह समाज के भलाई के लिए है
- इसके पीछे राजनीतिक मान्यता है ।
- यह सरकार के अधिकारों को बढ़ाता है ।
- यह राज्य सरकार के द्वारा लागू करने के बाद ही नागरिकों को प्राप्त होता है।
- यह यूएसए के संविधान से लिया गया है ।
- इसका वर्णन संविधान के भाग 3 में किया गया है ।
- इसे लागू कराने के लिए न्यायलय की शरण ले सकते हैं ।
- यह व्यक्ति के अधिकार के लिए है ।
- मौलिक अधिकारों के पीछे कानूनी मान्यता है ।
- यह सरकार के महत्व को बढ़ाता है ।
- यह अधिकार नागरिकों को स्वत प्राप्त हो जाता है।
✢ भारतीय संविधान की प्रस्तावना ✢
महत्वपूर्ण जानकारी ➤
- प्रस्ताव रखा ➺13 दिसंबर 1946
- पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर 1946 को रखा।
- प्रस्ताव पारित हुआ ➺ 22 जनवरी 1947
नोट ➺
- प्रस्तावना को संविधान के अन्य भागों की तरह संविधान द्वारा पारित किया गया।
- भारतीय संविधान की प्रस्तावना पर अमेरिकी क्रांति 1776 और फ्रांसीसी क्रांति 1789 की झलक दिखती है।
प्रमुख वाद ➺
- बेरुबारी वाद 1960 ➺ प्रस्तावना संविधान का अंग नहीं है।
- केशवानंद भारती बनाम केरल 1973 वाद ➺ प्रस्तावना संविधान का अंग है और व्याख्या का आधार है।
- एसआर बोम्मई बनाम 1993 ➺ प्रस्तावना न केवल सविधान का अंग है बल्कि आधारभूत ढांचे का भी भाग हैं।
- गजेंद्र गडकर ➺ संविधान का बुनियादी दर्शन है।
- अर्नेस्ट बाकर ➺ संविधान की कुंजी है।
- एन ए पालीकीवाला ➺ संविधान का परिचय पत्र।
- के एम मुंशी ➺ राजनैतिक कुंडली।
- पी टी भार्गव व नेहरू ➺ संविधान की आत्मा।
- अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर ➺ दीर्घकालीन सपनों का विचार।
- केशवानंद भारती बनाम सन 1973 ➺ संविधान की आंख।
✢ प्रस्तावना ✢
‘हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न समाजवादी पंथ निरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपने इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर 1949 ( मिति मार्गशीयशुक्ल सप्तमी संवत 2006 विक्रमी ) को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत अधिनियमित और आत्माप्रीत करते है।प्रस्तावना की मुख्य बातें ➺
- प्रथम वाक्य ➺ हम भारत के लोग
- अंतिम वाक्य ➺ अंगीकृत, अधिनियमित, आत्माप्रीत
- प्रस्तावना में न्याय ➺ सामाजिक, आर्थिक राजनीतिक,
आर्थिक न्याय सभी व्यक्तियों के न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति (अनुच्छेद 39 जीविका के समान अवसर समान कार्य समान वेतन)
- राजनीतिक न्याय सम्मान मताधिकार चुनाव लड़ने का अधिकार (व्यस्क मताधिकार)
- प्रस्तावना में स्वतंत्रता विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म, उपासना की स्वतंत्रता
- प्रस्तावना में समानता प्रतिष्ठा व अवसर की समानता
- विवरणात्मक गरीमा, एकता, अखंडता, बंधुता
- उद्देश्यआत्मक भाग संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्षता गणराज्य नोट
- समाजवादी देश के संसाधनों का सामूहिक हित में प्रयोग, धन के केंद्रीकरण पर रोक।
- पंथनिरपेक्षता कोई राज्य धर्म नहीं, सभी धर्मों को बढ़ाने के उचित अवसर।
- लोकतंत्र भारत में जनता का, जनता के द्वारा, जनता के लिए शासन
- गणराज्य राज्याध्यक्ष निर्वाचित होगा, न की वंशानुगत, नागरिकता की अवधारणा पर बल।

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